नेशनल वैक्सीनेशन डे: बच्चों को समय पर टीका लगवाना है सबसे बड़ी सुरक्षा, यहां देखें शेड्यूल

भारत में हर साल 16 मार्च को नेशनल वैक्सीनेशन डे मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा में टीकाकरण की अहम भूमिका को याद दिलाता है। टीके ने दुनिया भर में लाखों बच्चों की जान बचाई है और कई खतरनाक बीमारियों को खत्म कर दिया है या उन्हें पूरी तरह नियंत्रित कर लिया है। आज भी नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं, इसलिए बच्चों को सही उम्र में और सही खुराक में टीका लगवाना बहुत जरूरी है।

यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, वैक्सीनेशन तब सबसे ज्यादा असरदार होते हैं, जब उन्हें बच्चे की उम्र के हिसाब से समय पर दिया जाए। कई बीमारियां खास उम्र में ज्यादा खतरनाक होती हैं। जैसे पोलियो ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, इसलिए पोलियो के टीके इसी उम्र में दिए जाते हैं। अगर टीका समय पर न लगे या बिल्कुल न लगे, तो बच्चा गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है।

जन्म के समय दिए जाने वाले टीके की बात करें तो इसमें बीसीजी का टीका आता है, जो तपेदिक (टीबी) से बचाता है। संभावित दुष्प्रभाव इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन, स्राव, हल्का बुखार या सिरदर्द हो सकता है। दूसरा ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) है, यह मुंह से दी जाने वाली पहली खुराक है, पोलियो वायरस से बचाता है और इसका कोई आम दुष्प्रभाव नहीं। तीसरा है हेपेटाइटिस बी जो लीवर के वायरल संक्रमण से बचाव में मददगार है। इंजेक्शन वाली जगह पर लालिमा और हल्का दर्द हो सकता है।

6 सप्ताह के बच्चे के टीके की बात करें तो इसमें ओपीवी – 1, पेंटावेलेंट – 1, रोटावायरस वैक्सीन – 1, पीसीवी – 1 है, ये टीके डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी, हिब, रोटावायरस (गंभीर दस्त), निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और पोलियो से बचाते हैं। इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन-दर्द, हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन, थकान या भूख कम लगना।

10 सप्ताह के बच्चे के टीके की बात करें तो पेंटावेलेंट – 2, ओपीवी – 2, रोटावायरस वैक्सीन – 2 शामिल है। इसके दुष्प्रभाव भी इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन-दर्द, हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन, थकान या भूख कम लगना है। हालांकि, ये कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। वहीं, 14 सप्ताह के बच्चे के टीके में पेंटावेलेंट – 3, ओपीवी – 3, रोटावायरस वैक्सीन – 3, पीसीवी – 2 शामिल है। ये खुराक कई बीमारियों से लंबे समय तक सुरक्षा देती हैं।

9-12 महीने के बच्चे के टीके में खसरा-रूबेला (एमआर) – 1, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई-1), पीसीवी बूस्टर खसरा-रूबेला से बुखार, दाने और जटिलताओं से बचाव। जेई मच्छर से फैलने वाली गंभीर ब्रेन बीमारी रोकता है। वहीं, 16-24 महीने के बच्चे के टीके में एमआर-, जेई-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर हैं। ये बूस्टर टीके पहले दिए गए टीकों की सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

5-6 साल के बच्चे के टीके में डीपीटी बूस्टर-2, स्कूल जाने से पहले यह बूस्टर जरूरी है। साथ ही 10 साल और 16 साल के बच्चे के लिए टिटनेस और डिप्थीरिया (टीडी) – दोनों उम्र में एक-एक खुराक देना जरूरी है। यह टेटनस और डिप्थीरिया से बचाव करता है, जो घाव से हो सकते हैं। (इनपुट -आईएएनएस)

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