डीडीयू-जीकेवाई 1.0 परियोजनाओं के समापन पर राष्ट्रीय कार्यशाला, राज्यों ने साझा की सर्वोत्तम प्रथाएं

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोमवार को नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), पूसा में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 1.0 के अंतर्गत परियोजनाओं के समापन को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत की। 7 और 8 सितंबर को आयोजित इस कार्यशाला में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि तथा तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला में डीडीयू-जीकेवाई 1.0 की लंबित परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण, उनके औपचारिक समापन, सामने आ रही चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक कौशल देने की योजना

डीडीयू-जीकेवाई, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रमुख रोजगार-उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए बाजार आधारित कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा उन्हें स्थायी आजीविका हासिल करने में सक्षम बनाना है।

राज्यों और तकनीकी विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा

कार्यशाला में ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (एनएबीकॉन्स) और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) के तकनीकी विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हुए। पहले दिन परियोजनाओं के समापन से जुड़ी परिचालन और तकनीकी चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं, केस स्टडी तथा विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

लंबित परियोजनाओं के लिए परियोजना-विशिष्ट रणनीति पर जोर

उद्घाटन सत्र में निदेशक (ग्रामीण कौशल) पवन कुमार ने सभी लंबित परियोजनाओं पर कार्रवाई के लिए परियोजना-विशिष्ट और कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने समय पर बाधाओं का समाधान करने और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

2,000 से अधिक परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण पर फोकस

संयुक्त सचिव (ग्रामीण कौशल-II) जयश्री एमजी ने 2,000 से अधिक डीडीयू-जीकेवाई 1.0 परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण को पूरा करने के लिए समन्वित, समयबद्ध और अभियान आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने डीडीयू-जीकेवाई 2.0 की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया, जिसमें कम से कम 70% रोजगार प्राप्ति और रोजगार प्रतिधारण को मजबूत करना शामिल है।

तकनीकी सत्र में परियोजना समापन की प्रक्रिया पर चर्चा

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्र में एनएबीकॉन्स और एनआईआरडीपीआर ने डीडीयू-जीकेवाई 1.0 के तहत परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण को पूरा करने से संबंधित प्रस्तुतियां दीं। इसमें सर्वोत्तम प्रथाओं, केस स्टडी, सामने आ रही चुनौतियों, संभावित समाधानों तथा प्रक्रिया में शामिल विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने लंबित मुद्दों के समाधान और व्यवस्थित समापन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीकों पर विचार किया।

14 राज्यों ने साझा किए अनुभव

आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने-अपने राज्यों में डीडीयू-जीकेवाई 1.0 परियोजनाओं के पूर्ण होने की स्थिति भी प्रस्तुत की।

सर्वोत्तम प्रथाओं और चुनौतियों पर हुआ विचार-विमर्श

राज्यवार प्रस्तुतियों ने एक-दूसरे से सीखने और प्रभावी कार्यप्रणालियों को साझा करने का मंच उपलब्ध कराया। इस दौरान कार्यान्वयन के स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों तथा मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित अन्य हितधारकों के बीच समन्वित कार्रवाई की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।

पारदर्शी और समयबद्ध समापन पर सहमति

कार्यशाला के समापन पर विचार-विमर्श से सामने आए प्रमुख निष्कर्षों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को एकत्रित किया गया। प्रतिभागी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने डीडीयू-जीकेवाई 1.0 के तहत परियोजनाओं के दस्तावेजीकरण को पूरा करने और पारदर्शी, जवाबदेह तथा समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं का समापन सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय और तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। (इनपुट: पीआईबी)