डेंगू के इलाज की दिशा में नई उम्मीद जगी है। दिल्ली एम्स के शोधकर्ताओं ने डेंगू वायरस की वृद्धि से जुड़ी एक अहम प्रक्रिया का पता लगाया है। इस अध्ययन में सामने आया है कि आरएनए के कुछ छोटे टुकड़े वायरस की वृद्धि को बढ़ा भी सकते हैं और रोक भी सकते हैं। वैज्ञानिकों की यह खोज भविष्य में डेंगू के लिए लक्षित एंटीवायरल उपचार विकसित करने में मददगार हो सकती है।
डेंगू के खिलाफ लड़ाई में दिल्ली के एम्स के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एम्स के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि ट्रांसफर आरएनए यानी टीआरएनए के छोटे-छोटे टुकड़े, जिन्हें टीआरएफएस कहा जाता है, डेंगू वायरस की वृद्धि को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शोध के मुताबिक, इनमें से कुछ टुकड़े वायरस की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं, जबकि कुछ उसकी वृद्धि को रोकने में मदद कर सकते हैं।
यह अध्ययन एम्स के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. भूपेंद्र वर्मा के नेतृत्व में किया गया। शोध दल में पीएचडी शोधार्थी दीक्षा माधरी, रिया रॉय और अरीबा अज़ीज़ शामिल हैं।
यह शोध 14 अक्टूबर को एनएआर मॉलिक्यूलर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं की यह खोज डेंगू वायरस की कार्यप्रणाली को समझने के साथ-साथ उसके खिलाफ नई उपचार रणनीतियां विकसित करने का रास्ता खोल सकती है।वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में इन आरएनए अंशों को निशाना बनाकर ऐसे एंटीवायरल उपचार विकसित किए जा सकेंगे, जो वायरस की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद करें।


