भारत का वस्त्र उद्योग देश के सबसे पुराने और विविध उद्योगों में से एक है, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी परंपराओं में हैं। बजट 2026–27 वस्त्र उद्योग को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखता है और अर्थव्यवस्था के लिए इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। श्रम-प्रधान (labour-intensive) इस उद्योग को प्राथमिकता देकर बजट ने वस्त्रों को रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि, ग्रामीण आजीविका और टिकाऊ विनिर्माण का प्रमुख चालक माना है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय वस्त्र उद्योग में कई अंतर्निहित (intrinsic) ताकतें हैं-
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कपास के रकबे के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक,
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जूट का सबसे बड़ा उत्पादक,
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रेशम और कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक,
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मानव-निर्मित रेशों (MMF) में दूसरा बड़ा वैश्विक केंद्र,
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तथा पॉलिएस्टर और विस्कोस रेशों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
विकास की बुनाई: बजट 2026–27 कैसे भारत के वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देता है
केंद्रीय बजट 2026–27 में फाइबर से फैशन तक, ग्राम उद्योगों से वैश्विक बाजारों तक पूरी वस्त्र मूल्य शृंखला को मजबूत करने के लिए एक समग्र और एकीकृत नीति ढांचा घोषित किया गया है।
वस्त्र उद्योग के लिए एकीकृत कार्यक्रम (Integrated Programme)
प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, आत्मनिर्भरता (self-reliance) को प्रोत्साहित करने और रोजगार सृजन के उद्देश्य से सरकार ने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया है, जिसके पाँच उप-घटक हैं—
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राष्ट्रीय फाइबर योजना (National Fibre Scheme):
यह योजना रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ एमएमएफ और नई पीढ़ी के रेशों को समर्थन देकर पूरे फाइबर स्पेक्ट्रम में आत्मनिर्भरता बनाने का लक्ष्य रखती है। घरेलू फाइबर उपलब्धता को मजबूत करने और उन्नत वस्त्र सामग्री में नवाचार को बढ़ावा देकर आयात निर्भरता कम करने, कपास से आगे विविधीकरण और उच्च-प्रदर्शन व विशेषीकृत वस्त्रों में भारत की क्षमता बढ़ाने पर फोकस है। -
वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना (Textile Expansion and Employment Scheme):
पारंपरिक वस्त्र क्लस्टरों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित यह घटक मशीनरी, तकनीकी उन्नयन और साझा परीक्षण व प्रमाणन केंद्रों की स्थापना के लिए पूंजी समर्थन देता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी, गुणवत्ता अनुपालन सुधरेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव होगा। -
राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम (National Handloom and Handicraft Programme):
हथकरघा और हस्तशिल्प की मौजूदा योजनाओं को एकीकृत कर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सशक्त किया जाएगा। उद्देश्य है बुनकरों और कारीगरों को लक्षित समर्थन, आय में सुधार, बाजार से जोड़ और भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत का संरक्षण। इसके अतिरिक्त, मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम और आवश्यकता-आधारित विशेष अवसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्राकृतिक और वनस्पति रंगों के प्रचार तथा डाई हाउस की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। -
टेक्स-ईको पहल (Tex-Eco Initiative):
यह पहल वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ वस्त्र एवं परिधान (T&A) विनिर्माण को बढ़ावा देती है। घरेलू उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता मानकों के अनुरूप बनाते हुए उभरते ग्रीन बाजारों तक पहुंच का समर्थन करती है। -
समर्थ 2.0 (Samarth 2.0):
उन्नत स्किलिंग कार्यक्रम समर्थ 2.0 उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ गहरे सहयोग के जरिए वस्त्र कौशल पारिस्थितिकी तंत्र (skill ecosystem) को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य मूल्य शृंखला के हर चरण में उद्योग-तैयार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना है।
मेगा टेक्सटाइल पार्क और तकनीकी वस्त्र
सरकार ने चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा की है, ताकि एकीकृत अवसंरचना, स्केल दक्षता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिले। ये पार्क तकनीकी वस्त्रों के विकास को भी समर्थन देंगे, जिनका उपयोग औद्योगिक, चिकित्सा, रक्षा और अवसंरचना क्षेत्रों में होता है।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल
यह पहल खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें वैश्विक बाजार से जुड़ाव, ब्रांडिंग, सरल प्रशिक्षण, स्किलिंग, गुणवत्ता सुधार और प्रक्रिया आधुनिकीकरण पर जोर है। इसका लाभ बुनकरों, ग्राम उद्योगों और ग्रामीण युवाओं को मिलेगा, साथ ही एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल को समर्थन मिलेगा।
वस्त्र और संबद्ध क्षेत्रों के लिए निर्यात प्रोत्साहन उपाय
वस्त्र और संबद्ध क्षेत्रों के निर्यात को समर्थन देने के लिए बजट में निर्यात दायित्व अवधि को छह महीने से बढ़ाकर बारह महीने किया गया है। यह सुविधा शुल्क-मुक्त आयातित इनपुट से बने वस्त्र परिधान, चमड़ा परिधान, चमड़ा/सिंथेटिक फुटवियर और अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यातकों को दी जाएगी। इससे परिचालन लचीलापन, अनुपालन में आसानी और कार्यशील पूंजी प्रबंधन में सुधार होगा।
TReDS क्या है?
TReDS (Trade Receivables Discounting System) एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जो एमएसएमई के व्यापारिक बकाया (receivables) का वित्तपोषण और डिस्काउंटिंग कई फाइनेंसर्स के जरिए संभव बनाता है। ये बकाया कॉरपोरेट्स, अन्य खरीदारों, सरकारी विभागों और पीएसयू से हो सकते हैं।
TReDS के जरिए वस्त्र एमएसएमई के लिए तरलता समर्थन
वस्त्र एमएसएमई की तरलता पहुंच मजबूत करने के लिए सरकार ने TReDS की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय घोषित किए हैं, जिसके जरिए अब तक ₹7 लाख करोड़ से अधिक की सुविधा दी जा चुकी है।
मुख्य उपाय:
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एमएसएमई से खरीद में सीपीएसई के लिए TReDS का अनिवार्य उपयोग
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TReDS पर इनवॉयस डिस्काउंटिंग के लिए CGTMSE के माध्यम से क्रेडिट गारंटी समर्थन
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सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS से जोड़ना, ताकि सरकारी खरीद के बकाया का तेज और कम लागत वाला वित्तपोषण हो सके
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TReDS रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के रूप में पेश करना, ताकि सेकेंडरी मार्केट भागीदारी और तरलता बढ़े
SME ग्रोथ फंड और चैंपियन SMEs
भविष्य के “चैंपियन SMEs” को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का समर्पित SME ग्रोथ फंड शुरू किया गया है, जो चयनित मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन देगा।
भारत में विकास, निर्यात और रोजगार को गति देता वस्त्र क्षेत्र
लगभग USD 179 बिलियन के आकार वाला भारतीय T&A उद्योग देश के GDP में ~2%, विनिर्माण GVA में ~11% और निर्यात में 8.63% का योगदान देता है, जो अर्थव्यवस्था में इसकी अहम भूमिका को दर्शाता है।
निर्यात में निरंतर वृद्धि
वैश्विक स्तर पर भारत T&A का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है, जिसकी विश्व निर्यात में ~4% हिस्सेदारी है।
FY25 में (हस्तशिल्प सहित) T&A निर्यात USD 37.75 बिलियन रहा, जो FY24 के USD 35.87 बिलियन से अधिक है, भले ही वैश्विक व्यापार सुस्त रहा हो।
दिसंबर 2025 में निर्यात वृद्धि प्रमुख खंडों में व्यापक रही—
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हस्तशिल्प: 7.2%
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रेडीमेड गारमेंट्स: 2.89%
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MMF यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स: 3.99%
क्या आप जानते हैं?
जनवरी–नवंबर 2025 के दौरान भारत के वस्त्र निर्यात में 118 देशों/गंतव्यों में वृद्धि दर्ज की गई। 2025 में यूएई, मिस्र, पोलैंड, सूडान, जापान, नाइजीरिया, अर्जेंटीना, कैमरून और युगांडा सहित कई उभरते व पारंपरिक बाजारों में विविधीकरण हुआ। स्पेन, फ्रांस, नीदरलैंड्स, जर्मनी और यूके जैसे प्रमुख यूरोपीय बाजारों में भी वृद्धि स्थिर रही।
रोजगार सृजन
कृषि के बाद वस्त्र क्षेत्र भारत का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026–27 के अनुसार, 8 प्रमुख उद्योग समूहों में रोजगार में वस्त्र उद्योग की हिस्सेदारी 9% है। 2025 के अनुमानों के मुताबिक यह क्षेत्र 45 मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है, जिनमें महिलाएं और ग्रामीण समुदाय शामिल हैं।
भारत के वस्त्र क्षेत्र के विकास चालक
भारत ने किफायती मास-मार्केट परिधान से लेकर निच (niche) उच्च-मूल्य खंडों तक, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की व्यापक मांग पूरी करने की क्षमता विकसित की है। प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार कई लक्षित पहलों के जरिए समर्थन दे रही है—
PM MITRA योजना की 2025 में उल्लेखनीय प्रगति
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7 PM मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क स्थापित करने की मंजूरी, कुल परिव्यय ₹4445 करोड़ (7 वर्ष, 2027–28 तक)।
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₹27,434 करोड़+ संभावित निवेश के MoUs पर हस्ताक्षर।
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सभी 7 राज्यों में ₹2590.99 करोड़ के अवसंरचना कार्य शुरू।
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प्रत्येक पार्क से 3 लाख रोजगार (1 लाख प्रत्यक्ष, 2 लाख अप्रत्यक्ष) और ₹10,000 करोड़ अनुमानित निवेश।
वस्त्रों के लिए PLI योजना
FY 2029–30 तक लागू PLI योजना का लक्ष्य MMF परिधान, फैब्रिक्स और तकनीकी वस्त्रों का उत्पादन बढ़ाना है, ताकि उद्योग स्केल हासिल करे, प्रतिस्पर्धी बने, रोजगार सृजन हो और टिकाऊ उद्यम विकसित हों।
कपास क्षेत्र सुधार
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कपास क्षेत्र ~60 लाख किसानों और मूल्य शृंखला में 4–5 करोड़ लोगों को समर्थन देता है।
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पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कपास किसान मोबाइल ऐप लॉन्च।
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‘कस्तूरी कॉटन भारत’ कार्यक्रम से भारतीय कपास की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास।
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कपास गांठों के लिए QCO 2023 को अगस्त 2026 तक स्थगित किया गया।
स्थिरता और सर्कुलैरिटी को बढ़ावा
टेक्सटाइल्स कमेटी, GeM, SCOPE, Circle Back अभियान, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और राष्ट्रीय वस्त्र स्थिरता परिषद के बीच त्रिपक्षीय MoU, ताकि अपसाइकल्ड उत्पादों की सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा मिले।
श्रम सुधार
नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) से वेतन, रोजगार शर्तें, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और विवाद समाधान का एकीकृत ढांचा बनेगा, जिससे अनुपालन सरल और श्रमिक कल्याण मजबूत होगा।
वस्तु एवं सेवा कर 2.0 (GST)
2025 में वस्त्रों में नेक्स्ट-जेन GST तर्कसंगतकरण से उपभोक्ताओं के लिए कीमतें घटीं, निर्माताओं को राहत मिली और निर्यात व रोजगार को बढ़ावा मिला।
वस्त्र क्षेत्र का आउटलुक
हालिया नीति फोकस स्केल और आधुनिकीकरण पर है—एकीकृत टेक्सटाइल पार्क, MMF व तकनीकी वस्त्रों को समर्थन, निवेश प्रोत्साहन और कच्चे माल की बाधाओं में ढील से प्रतिस्पर्धा और मूल्य संवर्धन बढ़ेगा।
वस्त्र मंत्रालय ने निर्यात के लिए विजन 2030 तय किया है—वर्तमान ~₹3 लाख करोड़ से बढ़ाकर ~₹9 लाख करोड़, मजबूत घरेलू विनिर्माण और व्यापक वैश्विक पहुंच के जरिए।
व्यापार विकास भी सकारात्मक हैं। भारत–ईयू एफटीए से वस्त्र और परिधान में शून्य शुल्क पहुंच, सभी टैरिफ लाइनों का कवरेज और 12% तक शुल्क में कमी मिलेगी। भारतीय लकड़ी, बांस और हस्तनिर्मित फर्नीचर पर भी 10.5% तक शुल्क घटेगा। इससे यूरोपीय बाजार में भारत के श्रम-प्रधान खंडों को बड़ा लाभ होगा।
केंद्रीय बजट 2026–27 रोजगार सृजन, समावेशी विकास, स्थिरता और राज्यों, उद्योग, MSMEs, कारीगरों व स्किलिंग संस्थानों के साथ समन्वित क्रियान्वयन पर जोर देता है, जिससे भारत एक प्रतिस्पर्धी, विश्वसनीय और भविष्य-उन्मुख वैश्विक वस्त्र एवं परिधान हब के रूप में मजबूत होगा
मजबूत उत्पादन आधार, बढ़ते निर्यात और सतत नीतिगत समर्थन के साथ भारत का वस्त्र क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।


