भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनने वाले प्रमुख पुलों की सुरक्षा, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए नई पहल शुरू की है। इसके तहत सभी नई परियोजनाओं में प्रमुख पुलों के हाइड्रोलिक अध्ययन और डिजाइन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों को सूचीबद्ध किया जाएगा।
करीब 12 आईआईटी ने जताई सहयोग की इच्छा
एनएचएआई के अनुसार आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी रुड़की और आईआईटी खड़गपुर सहित लगभग 12 आईआईटी तथा कई अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों ने इस पहल में सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण शुरू होने से पहले 100 वर्ष या उससे अधिक की सेवा अवधि के लिए तैयार किए गए प्रमुख पुलों के डिजाइन की स्वतंत्र और कठोर तकनीकी समीक्षा हो।
डिजाइन और निर्माण की होगी व्यापक समीक्षा
इस पहल के तहत पुलों के संरचनात्मक डिजाइन की गणनाओं, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, निर्माण पद्धतियों, भू-तकनीकी जांच और हाइड्रोलिक अध्ययनों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इससे पुल परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और डिजाइन व निर्माण प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
सभी परियोजना मॉडल पर लागू होगी व्यवस्था
एनएचएआई ने बताया कि यह संस्थागत ढांचा पुल निर्माण की विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन प्रणालियों पर समान रूप से लागू होगा। इससे अलग-अलग परियोजना मॉडल में भी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक समान और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
संरचनात्मक सुरक्षा और विश्वसनीयता होगी मजबूत
प्राधिकरण का मानना है कि इस पहल से पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा, डिजाइन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और लंबे समय में परिचालन संबंधी जोखिम कम होंगे। यह कदम उच्च गुणवत्ता, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने के एनएचएआई के व्यापक उद्देश्य को भी मजबूती देगा। (इनपुट: पीआईबी)


