राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतिभाई बांभणिया ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय और हस्तकला अकादमी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों से संवाद कर उनके अनुभवों, पारंपरिक कला और कौशल की जानकारी ली तथा भारतीय हथकरघा परंपरा को जीवित रखने में उनके योगदान की सराहना की।
बुनकरों और कारीगरों से किया संवाद
राज्य मंत्री ने बुनकरों एवं कारीगरों से बातचीत के दौरान उनकी पारंपरिक कला, तकनीक और कार्य अनुभवों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने हथकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में बुनकरों और कारीगरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और उन्हें प्रोत्साहित किया।
‘वोकल फॉर लोकल’ से नए अवसर
निमुबेन बांभणिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से बुनकरों को स्थानीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल रही है। इससे उनके लिए आय के नए अवसर पैदा होने के साथ-साथ पारंपरिक कौशल के संरक्षण में भी मदद मिल रही है।
महिला बुनकरों की कला को बताया विरासत की शक्ति
राज्य मंत्री ने कहा कि महिला बुनकरों की कला भारत की समृद्ध विरासत की शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प देश की समृद्ध संस्कृति और रचनात्मकता के साथ आत्मनिर्भर भारत की पहचान को भी सशक्त बनाते हैं।
बुनकर और कारीगर आत्मनिर्भर भारत के सशक्त स्तंभ
निमुबेन बांभणिया ने हथकरघा क्षेत्र में बुनकरों और कारीगरों के पारंपरिक कौशल एवं योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बुनकर और कारीगर आत्मनिर्भर भारत के सशक्त स्तंभ हैं। उन्होंने हथकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
परंपरागत कौशल के संरक्षण पर जोर
राज्य मंत्री ने कहा कि भारतीय हथकरघा परंपरा केवल वस्त्र निर्माण की कला नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और पीढ़ियों से चले आ रहे कौशल का प्रतीक है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए बुनकरों एवं कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। (इनपुट: पीआईबी)


