नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने देश में डेटा सेंटर क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा सेंटर मूल्यांकन ढांचा जारी किया है। 14 अक्टूबर को जारी इस ढांचे का उद्देश्य राज्यों को डेटा सेंटर में निवेश की योजना बनाने, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता का आकलन करने और बिजली, पानी तथा जमीन जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करना है।
इस ढांचे को नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन और विशिष्ट फेलो देबजानी घोष की उपस्थिति में जारी किया गया। कार्यक्रम में बिजली मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), वाणिज्य मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), उद्योग जगत और मीडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
उद्योग जगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बिजली मंत्रालय और DPIIT के सुझावों से तैयार यह ढांचा राज्य सरकारों को डेटा सेंटर परियोजनाओं की योजना बनाने, उनका मूल्यांकन करने और निवेश को सुविधाजनक बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन देता है। इसका उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा देना है, जिनके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और संसाधन लंबे समय तक उपलब्ध रह सकें।
भारत में डेटा सेंटर की क्षमता वर्ष 2020 में लगभग 375 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 1.5 गीगावाट हो गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, उच्च प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग और अधिक डेटा की जरूरत वाले डिजिटल अनुप्रयोगों की बढ़ती मांग को इस वृद्धि का प्रमुख कारण बताया गया है।
भारत में AI और डिजिटल तकनीक का विस्तार होने के साथ डेटा सेंटर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर इनके विकास से बिजली, पानी, जमीन, कनेक्टिविटी और स्थानीय सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में राज्यों को निवेश आकर्षित करने के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि परियोजनाएं उन स्थानों पर स्थापित हों, जहां आवश्यक संसाधन और सुविधाएं लंबे समय तक उपलब्ध रह सकें।
केंद्र सरकार ने डेटा सेंटर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें भारत स्थित डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने वाले पात्र विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए वर्ष 2047 तक कर छूट का प्रावधान भी शामिल है। नीति आयोग के अनुसार, निवेश का आकार बढ़ने के साथ राज्यों की ओर से बेहतर योजना और निवेश के लिए तैयार बुनियादी ढांचा विकसित करना जरूरी होगा।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि डेटा सेंटर में निवेश का इस्तेमाल भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने घरेलू अनुसंधान एवं विकास, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग तथा डेटा सेंटर तकनीक की पूरी मूल्य श्रृंखला में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उन्नत कूलिंग तकनीक, ऊर्जा दक्षता और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने वाली कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत नए समाधान विकसित कर सकता है। इससे बुनियादी ढांचे में होने वाला निवेश लंबे समय तक आर्थिक और तकनीकी लाभ दे सकेगा।
नीति आयोग के सीईओ अनुराग जैन ने कहा कि राज्यों को केवल निवेश आकर्षित करने के बजाय निवेश के लिए जरूरी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए। डेटा सेंटर परियोजनाओं को सहायता देने से पहले राज्यों को बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, संसाधनों की जरूरत और संभावित आर्थिक लाभ का आकलन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह ढांचा राज्यों को तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने, संभावित बाधाओं का पहले से अनुमान लगाने और परियोजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य किसी अतिरिक्त नियामकीय व्यवस्था का निर्माण करना नहीं, बल्कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक तेज और पूर्वानुमान योग्य बनाना है।
नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष ने कहा कि AI वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल रहा है और डेटा सेंटर महत्वपूर्ण रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अवसर केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी टिकाऊ क्षमता विकसित करना भी है, जो देश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करे और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ दे।
मूल्यांकन ढांचे को पांच प्रमुख स्तंभों में बांटा गया है। इनमें बिजली एवं ऊर्जा, पानी एवं कूलिंग, स्थान चयन एवं पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक एवं रणनीतिक मूल्य तथा नीति, शासन और क्रियान्वयन शामिल हैं।
संसाधनों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ढांचे में बिजली ग्रिड की क्षमता और उससे होने वाली अतिरिक्त बिजली खपत का आकलन करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा ऊर्जा भंडारण आधारित बिजली व्यवस्था पर विचार करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, जल स्रोतों पर दबाव और सार्वजनिक जल आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने की जरूरत बताई गई है।
इसमें वर्षा जल संचयन, परिसर में ही पानी के उपचार और भंडारण तथा इलेक्ट्रॉनिक कचरे, बैटरियों और अन्य खतरनाक कचरे के पूरे जीवनचक्र के प्रबंधन की योजना बनाने पर भी जोर दिया गया है।
आर्थिक लाभ बढ़ाने के लिए उपयुक्त डेटा सेंटर क्षेत्र चिह्नित करने, कोलोकेशन सेवाओं और सक्रिय कंप्यूटिंग सेवाओं के बीच अंतर को ध्यान में रखने तथा राज्य सरकारों की प्रोत्साहन योजनाओं को मापने योग्य परिणामों से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी और गैर-आईटी बुनियादी ढांचे में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।
ढांचे में समयबद्ध मंजूरियों, स्पष्ट जवाबदेही और परियोजनाओं से जुड़े वादों की निगरानी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों को निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक लाभ और परियोजना लागू करने की तैयारी जैसे पहलुओं पर विचार करने में मदद देना है।
नीति आयोग के अनुसार, संभावित बाधाओं की पहले पहचान करने और परियोजनाओं की जरूरतों को स्पष्ट करने से निवेश संबंधी फैसले बेहतर होंगे, क्रियान्वयन का जोखिम घटेगा और भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
-(इनपुटः पीआईबी)


