कोई भी देश अकेले चिप नहीं बनाता, भारत के साथ मिलकर निर्माण करें कंपनियां: विक्रम मिस्री

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शुक्रवार को मजबूत और लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “कोई भी देश अकेले चिप नहीं बनाता” और कंपनियों से भारत में केवल कारोबार करने के बजाय “भारत के साथ मिलकर निर्माण” करने का आह्वान किया।

SEMICON India 2026 को संबोधित करते हुए मिस्री ने विभिन्न देशों और समुदायों से कार्यक्रम में जुटे हितधारकों को संबोधित करने का अवसर देने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मिस्री ने कहा, “मेरे लिए यह अवसर केवल एक चीज के बारे में है, और वह है साझेदारी। और यही वह शब्द है जिसका उल्लेख मेरे आने से ठीक पहले भी हुआ। इसलिए आज मैं इस बारे में बात करना चाहता हूं कि कोई भी देश अकेले चिप क्यों नहीं बनाता, साझेदारियों को टिकाऊ क्या बनाता है और उन कंपनियों के लिए अवसर कहां है, जो केवल भारत में नहीं, बल्कि भारत के साथ मिलकर निर्माण करने के इच्छुक हैं।”

उन्होंने कहा कि कभी अपेक्षाकृत कम चर्चित औद्योगिक घटक रहे सेमीकंडक्टर अब “आर्थिक क्षमता, तकनीकी परिपक्वता और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा” का पैमाना बन गए हैं। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि उन्नत देश भी पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा, “लेकिन कोई भी देश, चाहे वह कितना भी उन्नत क्यों न हो, इसे अकेले नहीं बना सकता।”

उन्होंने कहा, “ताइवान अकेले दुनिया की 90 प्रतिशत से अधिक सबसे उन्नत चिप्स का उत्पादन करता है। फिर भी यह उत्पादन डिजाइन सॉफ्टवेयर, उपकरणों और अन्य जगहों पर विकसित की गई सामग्रियों पर निर्भर है। इसलिए चिप शायद उद्योग द्वारा तैयार की गई सबसे सहयोगात्मक वस्तु हो सकती है। इस सदी में वही देश नेतृत्व करेंगे, जो यह जानते हैं कि देश के भीतर वास्तव में क्या बनाया जाना चाहिए और विदेशों में किनके साथ मिलकर निर्माण करना चाहिए।”

सेमीकंडक्टर उद्योग में साझेदारियों को बढ़ावा देने वाले कारकों को समझाते हुए मिस्री ने कहा कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के पास पूरी वैल्यू चेन की हर कड़ी नहीं है और इसी कारण आपूर्ति श्रृंखलाएं विश्वसनीय संबंधों के आधार पर विकसित हुई हैं।

उन्होंने कहा, “किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के पास हर एक कड़ी नहीं है। इसलिए उद्योग ने गठबंधनों के इर्द-गिर्द खुद को संगठित किया है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को उन संबंधों के माध्यम से मजबूत किया है, जो समय के साथ विश्वसनीय साबित हुए हैं। और मैं विश्वसनीय शब्द पर जोर देना चाहता हूं।”

उन्होंने सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन की संरचना को साझेदारी की पहली वजह बताया और कहा कि उत्पादन के अलग-अलग चरण अलग-अलग देशों में फैले हुए हैं।

मिस्री ने कहा, “पहली वजह यह है कि वैल्यू चेन खुद साझेदारी के लिए मजबूर करती है। डिजाइन प्रतिभा एक देश में है, उपकरण दूसरे में, फैब्रिकेशन तीसरे में, सामग्री चौथे में और असेंबली पांचवें देश में।”

उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में किसी विशेष क्षेत्र में अत्यधिक एकाग्रता विविधीकरण की जरूरत पैदा करती है। यह टकराव के कारण नहीं, बल्कि बेहतर औद्योगिक व्यवस्था के तौर पर जरूरी है।

मिस्री ने कहा, “दूसरी वजह यह है कि जहां भी एकाग्रता होती है, वहां उससे विविधता की ओर बढ़ना उचित है। यह संदेह के कारण नहीं, बल्कि अच्छी औद्योगिक प्रक्रिया के तौर पर है। आंकड़ों पर गौर करें तो कुछ ही देश और कभी-कभी एक अकेला देश दुनिया के अधिकांश दुर्लभ पृथ्वी प्रसंस्करण और उन्नत नोड विनिर्माण पर नियंत्रण रखते हैं। ये एकाग्रताएं डिजाइन के बजाय विशेषज्ञता से पैदा होती हैं।”

उन्होंने कहा, “अब कोई भी तर्कसंगत कारोबारी नेता इस सिद्धांत को समझता है कि एक विश्वसनीय स्रोत का मतलब विफलता का एकल बिंदु है और इसलिए यह ऐसी स्थिति है, जिससे आसानी से बचा जा सकता है। समझदारी भरी प्रतिक्रिया टकराव नहीं, बल्कि विश्वसनीय विकल्प तैयार करना है। और यही दूसरा शब्द है, जिस पर मैं जोर देता हूं: विश्वसनीय।”

उन्होंने आगे सेमीकंडक्टर क्षमताओं को समर्थन देने में सरकारों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनने की होड़ अब कंपनियों के लिए अवसर के साथ-साथ एक साझा राष्ट्रीय परियोजना भी बन गई है।

उन्होंने कहा, “तीसरी वजह यह है कि तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनने की दौड़ अब एक साझा राष्ट्रीय परियोजना है, कंपनियों के लिए एक अवसर है, न कि केवल राज्यों के बीच एक प्रतिस्पर्धा।”

मिस्री ने अमेरिका, चीन और यूरोप में चल रही सेमीकंडक्टर पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही हैं कि उनके उद्योग प्रतिस्पर्धी बने रहें।

उन्होंने कहा, “हर जगह सरकारें अपने उद्योगों को इस दौड़ में बनाए रखने के लिए आगे बढ़ रही हैं। यही अमेरिका के CHIPS Act के माध्यम से 50 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता, चीन की घरेलू क्षमता में निरंतर निवेश और वैश्विक विनिर्माण क्षमता का पांचवां हिस्सा हासिल करने की यूरोप की महत्वाकांक्षा के पीछे का तर्क है।”

मिस्री ने कहा, “यही भावना भारत के अपने SEMICON India कार्यक्रम के पीछे भी है। किसी कंपनी के लिए यह प्रोत्साहनों और इच्छुक साझेदारों से भरा हुआ एक परिदृश्य है और यही तीसरा शब्द है, जिस पर मैंने जोर दिया: प्रोत्साहन।”

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी मानक, प्रमाणन व्यवस्था और इंटरऑपरेबिलिटी प्रोटोकॉल भविष्य के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को प्रभावित करेंगे। मिस्री ने कहा, “जो भी तकनीकी मानकों, प्रमाणन व्यवस्थाओं और इंटरऑपरेबिलिटी प्रोटोकॉल को तैयार करने में मदद करता है, वह उस आधार को आकार देता है, जिस पर आने वाली एक पीढ़ी तक बाकी सभी निर्माण करेंगे।”

SEMICON India 2026 वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को एक मजबूत मंच पर एक साथ ला रहा है और उद्योग, सरकार, अकादमिक जगत तथा स्टार्ट-अप के बीच रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। 2026 का संस्करण महत्वपूर्ण विस्तार का प्रतीक है, जिसमें 20 से अधिक देशों की 500 से अधिक प्रदर्शक कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां पूरे माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में अत्याधुनिक तकनीकों, नवाचारों और समाधानों का प्रदर्शन कर रही हैं।

(इनपुट-एएनआई)

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