अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को वर्ल्ड लीडर्स से कहा कि एआई वह तकनीक है जिसने उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित किया और यह “हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म परिवर्तन” है।
यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है
पिचाई ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, “कोई भी तकनीक मुझे एआई से ज्यादा बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित नहीं करती। यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है। हम तीव्र प्रगति और नई खोजों के कगार पर हैं जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पारंपरिक कमियों को दूर करने में मदद कर सकती हैं।”
एआई से सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित या स्वचालित नहीं
उन्होंने सरकारों और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे सहयोगपूर्ण ढंग से साहसिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कार्य करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस तकनीक से सभी को लाभ मिले। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई से सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित या स्वचालित नहीं हैं। गूगल के सीईओ ने अल्फाफोल्ड का उदाहरण देते हुए एआई द्वारा संचालित वैज्ञानिक प्रगति का ज्रिक किया। गूगल डीपमाइंड की प्रोटीन फोल्डिंग तकनीक ने अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसका उपयोग 190 से अधिक देशों में तीन मिलियन से अधिक शोधकर्ताओं द्वारा मलेरिया के टीके विकसित करने के लिए किया जा रहा है।
गूगल डीएनए रोग मार्करों का सूचीकरण कर रहा है
उन्होंने कहा कि अल्फाफोल्ड ने दशकों के शोध को एक डेटाबेस में संकलित किया है जो अब दुनिया के लिए उपलब्ध है। उन्होंने आगे कहा कि गूगल डीएनए रोग मार्करों का सूचीकरण कर रहा है और ऐसे एआई एजेंट बना रहा है जो वैज्ञानिक पद्धति में सच्चे भागीदार के रूप में कार्य करते हैं।
एआई अरबों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है
गूगल के सीईओ ने भारत में कंपनी के बढ़ते निवेशों का भी जिक्र किया, जिसमें विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक एआई हब शामिल है, जो 15 अरब डॉलर के अवसंरचना निवेश का हिस्सा होगा। इसके अलाव पिचाई ने कहा कि वह भारत में बदलाव की रफ्तार से प्रभावित हैं। साथ ही, कहा हमें एआई को लेकर रुख साहसिक रखना चाहिए, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है।
कंपनी इंडिया-अमेरिका कनेक्ट पहल के तहत अमेरिका और भारत के बीच चार नई प्रणालियों सहित सब-सी फाइबर ऑप्टिक केबलों का एक विशाल नेटवर्क भी बना रही है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “भारत में, हम किसानों को उनकी आजीविका की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं। पिछले साल भारतीय सरकार ने एआई-आधारित पूर्वानुमान लाखों किसानों को भेजे, जिससे उन्हें खराब मौसम के बारे में चेतावनी मिली।” (इनपुट-आईएएनएस)


