एक समय ऐसा भी था कि उत्तर पूर्व के राज्य विकास की दौड़ में काफी पीछे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास की उंगली पकड़ कर अब ये राज्य उपलब्धियों की नयी कहानी लिख रहे हैं। गोवा व मिजोरम के बाद त्रिपुरा तीसरा ऐसा राज्य है जिसने पूर्ण साक्षरता दर को प्राप्त कर लिया है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को बताया कि अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसायटी (ULLAS) एवं नेशनल एडुकेशन पॉलिसी (NEP2020) की सहायता से त्रिपुरा ने इस उपलब्धि को हासिल किया है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (जिनके पास शिक्षा विभाग का दायित्व भी है) ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने में साक्षरता सबसे अधिक महत्व रखती है, जिसके कारण इस विषय में प्रधानमंत्री ने खुद कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं।
पूर्ण साक्षर वाला तीसरा राज्य बना त्रिपुरा
वर्ष 2022 से 2027 तक चलने वाला ULLAS नव भारत साक्षरता कार्यक्रम केंद्र प्रायोजित योजना 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन युवाओं और वयस्कों को लक्षित करती है, जिन्होंने कभी औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं इसमें रुचि ली जिसके तहत राज्य ने इस उंचाई को प्राप्त कर पाया। 95.6 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ त्रिपुरा ने पूर्ण साक्षरता दर प्राप्त की है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को जानकारी देते हुए कहा कि ये एक ऐतिहासिक क्षण है, हमें पूर्ण साक्षर राज्य की मान्यता मिली है, ये हमारे लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि त्रिपुरा को इस उंचाई तक पहुंचाने के लिए जिन्होंने अथक परिश्रम किया है शिक्षा विभाग, शिक्षक और छात्र मैं उन सभी को धन्यवाद करता हूं।
साहा ने कहा कि राज्य में 1961 में साक्षरता दर 20.24 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जहां से यह 1991 में 60.44 प्रतिशत, 2001 में 73.19 प्रतिशत और 2011 में 87.22 प्रतिशत हो गई। 2023-24 में साक्षरता दर 93.7 प्रतिशत थी और 2024-25 में यह बढ़कर 95.6 प्रतिशत हो गई। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्ण साक्षरता के लिए निर्धारित सीमा 95 प्रतिशत है। साहा ने बताया कि साक्षरता कार्यक्रम पहले लोगों को अपना नाम लिखना सिखाने तक सीमित था, लेकिन अब इसका फोकस आधारभूत साक्षरता और अंकगणित, पढ़ना, लिखना, बुनियादी अंकगणित, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, सतत शिक्षा और कौशल विकास को शामिल करने तक फैल गया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि त्रिपुरा हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है, अगर हम GDP की बात करें तो त्रिपुरा पूर्वोत्तर के राज्यों में असम के बाद दूसरे नंबर पर आता है, एवं सिक्किम के बाद त्रिपुरा की प्रति व्यक्ति आय दूसरी सबसे अधिक है।
त्रिपुरा ने पूर्ण साक्षरता कैसे हासिल की?
त्रिपुरा को 95% के आंकड़े को पार करने में जमीनी स्तर पर काम और तकनीक आधारित शिक्षा का मजबूत मिश्रण ही सहायक रहा। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि केन्द्रीय परियोजनाओं का लाभ पहले उत्तरपूर्वी राज्यों को पूरी तरह नहीं मिलता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर पूर्वी राज्यों का विशेष ध्यान रखा। घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने से लेकर सक्रिय ULLAS मोबाइल ऐप के व्यापक उपयोग किया गया, इस कार्यक्रम ने सुनिश्चित किया कि शिक्षा राज्य के सबसे दूरदराज के इलाकों तक भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले साल 17 मार्च को आयोजित फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी असेसमेंट टेस्ट में कुल 4,597 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 3,581 सफल हुए। इसके बाद पिछले साल 29 दिसंबर को 14,179 परीक्षार्थी और शामिल हुए, जिनमें से 13,909 पास हुए। इसके बाद इस साल 23 मार्च को कुल 5,896 में से 5,819 परीक्षार्थी पास हुए।राज्य भर में 2,228 स्वयंसेवकों ने साक्षरता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिन्हें 943 सामाजिक चेतना केन्द्रों से सहायता प्राप्त है। स्वतंत्रता के समय भारत की साक्षरता दर केवल 14% थी, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी, 2023-24 में ये दर बढ़कर 80.9 प्रतिशत हो गयी।
-(लेखिका आशिका सिंह की पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं।)


