इजरायल का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर पीएम मोदी बोले, ‘यह दोनों देशों की दोस्ती को समर्पित है’

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल दौरे पर वहां के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से नवाजा गया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत और इजरायल की दोस्ती को समर्पित किया। इसके साथ ही विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यह सम्मान भारत-इजरायल साझेदारी बनाने में पीएम मोदी की खास भूमिका को सही पहचान देता है।

भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में बेहतरीन योगदान के चलते प्रधानमंत्री मोदी को इस सम्मान से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने इजरायल के सर्वोच्च सम्मान मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे नेसेट मेडल पाकर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मैं इसे विनम्रता और आभार के साथ स्वीकार करता हूं। यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि भारत-इजरायल की दोस्ती पर मुहर है। यह उन साझा मूल्यों को दिखाता है, जो हमारे दोनों देशों को रास्ता दिखाते हैं।”

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया जाना सच में एक खास बात है। यह भारत-इजरायल साझेदारी बनाने में पीएम मोदी की खास भूमिका और इसे आगे बढ़ाने के उनके पक्के इरादे को सही पहचान देता है।”

पीएम मोदी ने सम्मानित होने के बाद इजरायली संसद नेसेट को संबोधित किया और इस सम्मान के लिए इजरायल की संसद का आभार जताया। संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुझे इस सम्मानित सदन को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय संसद ने इजरायल के लिए एक पार्लियामेंट्री फॉरेन ग्रुप बनाया है। मैं आप सभी को भारत आने के लिए आमंत्रित करता हूं। साथ ही हमारे संसद सदस्यों के बीच और ज्यादा बातचीत होने की उम्मीद करता हूं।

इजरायल की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “माननीय सदस्यों, पिछले कुछ वर्षों से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है। जल्द ही हम दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। हम ट्रेड बढ़ाने, इन्वेस्टमेंट फ्लो को मजबूत करने और जॉइंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

उन्होंने कहा, “हम दोनों पुरानी सभ्यताएं हैं और शायद इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि हमारी सभ्यता की परंपराओं में भी फिलॉसफी की समानताएं दिखती हैं। इजरायल में टिक्कुन ओलम का सिद्धांत दुनिया को ठीक करने की बात करता है। तो, वहीं भारत में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ इस बात पर जोर देता है कि दुनिया एक परिवार है। दोनों विचार जिम्मेदारी को आस-पास की सीमाओं से आगे ले जाते हैं।” (इनपुट-आईएएनएस)

 

 

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