विश्व के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में भारतीय वायुसेना ने आज ही के दिन, 26 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ शुरू किया था। यह अभियान भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन विजय’ को हवाई समर्थन देने के लिए चलाया गया था। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना ने बर्फीली चोटियों, दुर्गम हिमालयी इलाकों और 16,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया। ऑपरेशन सफेद सागर में वायुसेना ने लगभग 5,000 स्ट्राइक मिशन, 350 टोही मिशन, 800 एस्कॉर्ट उड़ानें और 2,000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित कीं थी।
वीर बलिदान
28 मई 1999 को ‘नुबरा’ फॉर्मेशन के तहत टोलोलिंग क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते समय स्क्वाड्रन लीडर आर. पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस. मुहिलान, सार्जेंट पी.वी.एन.आर. प्रसाद और सार्जेंट आर.के. साहू शहीद हो गए। उनके हेलीकॉप्टर को दुश्मन की स्टिंगर मिसाइल ने निशाना बनाया था। इन चारों वीर वायु योद्धाओं को मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
चुनौतीपूर्ण अभियान
कारगिल की बर्फीली चोटियों पर छिपे पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों को खदेड़ने के लिए वायुसेना ने MiG-21, MiG-23, MiG-27 और Mirage-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। खासकर Mirage-2000 विमानों द्वारा लेजर-निर्देशित बमों से किए गए सटीक हमलों ने युद्ध की दिशा बदल दी।
यह ऑपरेशन भारतीय वायुसेना की साहस, पेशेवर क्षमता और उच्च ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्र में हवाई शक्ति के प्रभावी उपयोग का बेहतरीन उदाहरण बन गया। थलसेना और वायुसेना के समन्वित प्रयासों से भारत इस युद्ध में विजयी हुआ।
भारतीय वायुसेना ने आज इस मौके पर कहा कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ ने विश्व के सबसे कठिन हिमालयी युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को एक बार फिर स्थापित किया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीरों के बलिदान और भारतीय वायुसेना की वीरता को आज पूरा देश नमन करता है। (इनपुट-एजेंसी)


