चक्रवात ‘दितवाह’ से तबाह हुए श्रीलंका की मदद के लिए भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत राहत और बचाव कार्यों की गति और बढ़ा दी है। जीवनरक्षक सहायता, आवश्यक राहत सामग्री और प्रारंभिक पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं श्रीलंका के विभिन्न क्षेत्रों-विशेष रूप से अत्यधिक प्रभावित और दुर्गम इलाकों तक लगातार पहुंचाई जा रही हैं। यह जानकारी मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने दी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘विजन सागर’ के तहत भारत इस संकट की घड़ी में श्रीलंका के लोगों के साथ दृढ़ता से खड़ा है और श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए राहत कार्यों को आगे बढ़ा रहा है।
आपातकालीन राहत सामग्री को वायु और समुद्री मार्गों से तेजी से भेजा गया
मंत्रालय ने बताया कि राहत कार्यों के दौरान आपातकालीन राहत सामग्री को वायु और समुद्री मार्गों से तेजी से भेजा गया। विशेषीकृत खोज एवं बचाव दल, मेडिकल और इंजीनियरिंग टीमें तैनात की गईं। ‘भीष्म क्यूब्स’ और ‘बेली ब्रिज सिस्टम’ जैसे उपकरणों को उपयोग में लाया गया तथा भारतीय सेना का फील्ड हॉस्पिटल स्थापित किया गया।
मंगलवार को भारतीय वायुसेना का एक और हेलिकॉप्टर श्रीलंका पहुंचा, जो श्रीलंका वायुसेना के साथ मिलकर दुर्गम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग करेगा। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, दो एमआई-17 हेलिकॉप्टरों के प्रस्थान के बाद भी यह नया हेलिकॉप्टर “दृढ़ संकल्प और मानवीय संवेदना के साथ” मिशन को आगे बढ़ाता रहेगा।
चक्रवात के बाद प्रशिक्षित बचाव दल भेजने वाला भारत सबसे पहला देश
ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत 28 नवंबर को हुई थी। चक्रवात दितवाह के बाद प्रशिक्षित बचाव दल भेजने वाला भारत सबसे पहला देश था। पहले 24 घंटों के भीतर टीमें मौके पर पहुंच गईं, जिससे बड़ी संख्या में फंसे लोगों की जान बचाई जा सकी। अब तक 450 से अधिक लोगों को बचाया और सहायता प्रदान की जा चुकी है।
बडुल्ला जिले के महियंगनया में स्थापित भारतीय सेना के फील्ड हॉस्पिटल में 8 दिसंबर तक 3,388 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें सर्जरी भी शामिल है। अस्पताल अभी भी वहीं तैनात है और राहत कार्य जारी हैं।
भारतीय सेना ने इंजीनियरों को चार सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों माध्यम से श्रीलंका भेजा
3 से 9 दिसंबर के बीच चार मॉड्यूलर बेली ब्रिज सिस्टम और भारतीय सेना के इंजीनियरों को चार सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों के माध्यम से श्रीलंका भेजा गया। इनके त्वरित निर्माण से भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाली में उल्लेखनीय सहायता मिलेगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “ऑपरेशन सागर बंधु” भारत और श्रीलंका की सरकारों और जनता के बीच गहरे भरोसे और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है। भारत पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ मिलकर अपना सहयोग जारी रखेगा। (इनपुट: आईएएनएस)


