भारत हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाता है, वर्ष 1949 में इसी दिन भारत के संविधान को स्वीकार किया गया था। देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था और हर साल भारत इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है। पचहत्तर वर्षों से, इसने न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का मार्गदर्शन करने के सिद्धांतों को कायम रखा है।
वहीं, न्याय विभाग ने भारत के गणतंत्र के रूप में 75वें वर्ष और भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में,आम जनता के लिए संविधान को सरल बनाने के लिए ‘हमारा संविधान हमारा सम्मान’ नामक पूरे भारत में वर्ष भर चलने वाला राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। अभियान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा 24 जनवरी,2024 को नई दिल्ली स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में शुरू किया गया था। आज यह अभियान एक समारोह से आगे बढ़कर एक राष्ट्रव्यापी नागरिक अभियान बन गया है।
सरकार की दिशा योजना से जुड़ा यह अभियान संवैधानिक साक्षरता को व्यावहारिक कानूनी सहायता के साथ जोड़ता है। नागरिक पंच प्राण प्रतिज्ञा ले सकते हैं, कानूनी साक्षरता कार्यशालाओं में शामिल हो सकते हैं और कानूनी सहायता के लिए सही समय पर टेली-लॉ और न्याय बंधु सेवाओं का उपयोग कर के संवैधानिक आदर्शों का जीवन में उपयोग कर सकते हैं।
गौरतलब हो, एक वर्ष के दौरान, इस अभियान ने देश भर में 13,700 से अधिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक करोड़ से अधिक नागरिकों को संगठित किया, जिन्हें शपथों, रचनात्मक प्रतियोगिताओं, कानूनी सहायता मेलों, जागरूकता कार्यशालाओं और डिजिटल प्लेटफार्मों जैसे विविध जनजागरण के उपायों से सहायती दी गयी। क्षेत्रीय कार्यक्रमों,हाशिए पर पड़े समुदायों और युवाओं पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने से यह सुनिश्चित हुआ कि अभियान का प्रभाव समावेशी और स्थायी दोनों हो।
संवैधानिक आदर्शों के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से एक साल तक चले अभियान के बाद, “हमारा संविधान – हमारा सम्मान” 24 जनवरी, 2025 को अपने अगले अध्याय: “हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान” में परिवर्तित हो गया। यह विकसित अभियान 2024-2025 के दौरान उत्पन्न गति को और आगे बढ़ाते हुए, संवैधानिक मूल्यों और कानूनी साक्षरता के साथ जनता की भागीदारी को मजबूत बना रहा है।
“स्वाभिमान” का उद्देश्य नागरिकों में गौरव और गहरी संवैधानिक चेतना का संचार करना है। यह प्रगति कानूनी साक्षरता लाने और नागरिकों को न केवल अपने अधिकारों को जानने, बल्कि उन पर गर्व करने के लिए सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
अभियान के उद्देश्यों में शामिल हैं-
- जन चेतना में भारत के संविधान के लिए एक विजुअल मार्कर बनाना।
- भारत के संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- संविधान को तैयार करने के लिए किए गए अथक परिश्रम को जनता के सामने लाना।
- भारत के लोगों में संविधान के प्रति गर्व की भावना पैदा करना।
पूरे भारत में आयोजित 13,700 से अधिक कार्यक्रमों और 1 करोड़ से अधिक नागरिकों की कुल भागीदारी के साथ, यह पहल नागरिकों में कानूनी साक्षरता और गर्व की भावना पैदा कर रही है। यह पहल केवल एक समारोह से कहीं अधिक, 2047 तक विकसित भारत के विचार को आकार देने में प्रत्येक भारतीय के सक्रिय योगदान के लिए एक उत्प्रेरक बन गई है।
यह राष्ट्रव्यापी अभियान तीन प्रमुख उप-अभियानों के माध्यम से साकार हुआ-
सबको न्याय – हर घर न्याय: किसी की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि पर ध्यान दिये बगैर सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करना।
नव भारत नव संकल्प- नवीन विचारों और नये संकल्प से प्रेरित होकर एक नए भारत का संकल्प।
विधि जागृति अभियान-जमीनी स्तर की पहलों और शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से कानूनी साक्षरता और जागरूकता को बढ़ावा देना।
1-सबको न्याय, हर घर न्याय
इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय जमीनी स्तर पर और सभी के लिए सुलभ हो। यह भारत के नागरिकों के लिए उपलब्ध कानूनी तंत्रों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है, चाहे वे न्यायालय, कानूनी सहायता सेवाएं या सुधार हों जिनका उद्देश्य भारत भर में कानूनी संस्थानों तक उनकी पहुंच को आसान करना है।
विभाग की विभिन्न पहलों के बारे में जागरूकता लाने और प्रत्येक नागरिक में कर्तव्य की भावना जगाने के लिए, सबको न्याय, हर घर न्याय ने नागरिकों में जागरूकता पैदा करने हेतु तीन नयी पहलकदमियां शुरू की हैं-
सबको न्याय: पंच प्राण प्रतिज्ञा – पंच प्राण प्रतिज्ञा निम्नलिखित का प्रतीक है:
- एक विकासोन्मुख देश
- दासता की मानसिकता का उन्मूलन
- अपनी परंपराओं पर गर्व
- एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता
- सभी नागरिकों में कर्तव्य बोध जगाना
साथ ही, नागरिक MyGov पोर्टल पर जाकर और शपथ को पढ़कर प्रतिज्ञा ले सकते हैं और ई-सर्टिफिकेट बना सकते हैं। जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को प्रेरित करने के लिए, क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए जो उन्हें MyGov प्लेटफ़ॉर्म अभियान पेज पर ले गए। ये कोड सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर भी साझा किए गए। 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) ने लोगों से इस आंदोलन को ग्रामीण स्तर तक फैलाने के लिए शपथ लेने का आग्रह किया।
न्याय सेवा मेला: राज्य स्तरीय विधिक सेवा मेला
न्याय सेवा मेला एक राज्य स्तरीय कार्यशाला/मेला है और 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाता है। कार्यशाला में विधि विद्यालयों के डीएलएसए/एसएलएसए/ विधि सहायता क्लीनिकों ने भाग लिया,जिससे न्याय विभाग की राज्य योजनाओं और कार्यक्रमों पर चर्चा को बढ़ावा मिला।
हमारा संविधान, हमारा सम्मान’ अभियान के बारे में जागरूकता
मेले में संबंधित राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं में लाभार्थियों की आवाज़ के चौथे संस्करण को जारी किया गया। इसके अलावा टेली-लॉ राज्य प्रोफ़ाइल पुस्तिका भी जारी की गयी और क्षेत्रीय पदाधिकारियों का अभिनंदन किया गया। प्रत्येक राज्य में एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिससे स्थानीय लोगों तक पहुंच बनी और टेली-लॉ सेवा तथा ‘हमारा संविधान, हमारा सम्मान’ अभियान के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया गया।
मेले के बाद सोशल मीडिया और समाचार चैनलों के साथ साथ प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों पर व्यापक प्रचार किया गया और यह पूरे भारत में 84,65,651 से अधिक नागरिकों तक पहुंचा। मेले में संबंधित राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं में लाभार्थियों की आवाज़ के चौथे संस्करण का विमोचन, टेली-लॉ राज्य प्रोफ़ाइल पुस्तिका और क्षेत्रीय पदाधिकारियों का अभिनंदन किया गया। प्रत्येक राज्य में एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिससे स्थानीय लोगों तक पहुंच बनाई गई और टेली-लॉ सेवा तथा ‘हमारा संविधान, हमारा सम्मान’ अभियान के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया गया।
मेले के बाद सोशल मीडिया और समाचार चैनलों, जिनमें प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों शामिल थे, पर व्यापक प्रचार किया गया और यह पूरे भारत में 84,65,651 से अधिक नागरिकों तक पहुंचा।
न्याय सहायक: समुदाय आधारित कानूनी संदेशवाहक
न्याय सहायक कानूनी संदेशवाहक होते हैं जो स्थानीय ब्लॉकों और जिलों में न्याय विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली कानूनी सेवाओं और समाधानों के बारे में घर-घर जाकर जागरूकता फैलाते हैं। न्याय सहायकों को लक्ष्य की पूर्ति के लिए रेफरल उद्देश्यों हेतु अलग-अलग पहचान पत्र दिए गए थे।
लाभार्थियों को कानून के बारे में शिक्षित करने के अलावा, न्याय सहायकों ने 14,598 से अधिक मामले दर्ज किए। न्याय सहायकों के सराहनीय कार्य के साथ-साथ, ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के निर्देशन में गांव या ब्लॉक स्तर पर कानून के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए “विधि बैठक” सत्र आयोजित किए गए।
विभिन्न स्थानों पर मासिक रूप से आयोजित होने वाली पांच बैठकों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत समिति/ग्राम सभा, विद्यालय प्रबंधन समितियां, स्वयं सहायता समूह और बच्चे और पर्यवेक्षक उन विभिन्न क्षेत्रों के समूहों में शामिल थे जिन्होंने भाग लिया।
नव भारत नव संकल्प अभियान
वहीं, नव भारत नव संकल्प अभियान, MyGov प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से नागरिकों, विशेषकर युवाओं के बीच पंच प्राण और संविधान के सिद्धांतों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शुरू की गई एक पहल है। इस अभियान में चार संवादात्मक गतिविधियां शामिल हैं-
2- विधि जागृति अभियान
विधि जागृति अभियान का उद्देश्य लोगों को, विशेष रूप से ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में, उनके कानूनी अधिकारों और उन्हें प्राप्त करने के साधनों के बारे में शिक्षित करना है। यह अभियान नागरिकों को कानून के तहत प्राप्त विभिन्न अधिकारों, जिनमें सामाजिक कल्याण लाभ, सकारात्मक कार्रवाई नीतियां और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए कानूनी सुरक्षा शामिल है, के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने का प्रयास करता है।
इस उप-अभियान में तीन परिवर्तनकारी पहलकदमियां निहित हैं-
ग्राम विधि चेतना- छात्रों ने कई गांवों में कानूनी जागरूकता गतिविधियां आयोजित कीं और जमीनी स्तर पर नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की। इस पहल से 10,000 से ज़्यादा लाभार्थियों तक पहुंच बनी।
वंचित वर्ग सम्मान अभियान- इस पहल के माध्यम से, विभाग ने इग्नू और दूरदर्शन के साथ मिलकर हाशिए पर पड़े विभिन्न समूहों के अधिकारों पर ऑनलाइन कार्यशालाएं एवं वेबिनार आयोजित की गई। वंचित वर्ग सम्मान अभियान के अंतर्गत, निम्नलिखित 7 विषयों पर चर्चा की गई-
- अधिकारों का सम्मान (बच्चे,दिव्यांग महिलाएं,अनुसूचित जाति,ट्रांसजेंडर और वरिष्ठ नागरिक)।
- देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चे
- महिला का अपमान
- विकलांग व्यक्तियों का सामाजिक समावेशन
- अनुसूचित जातियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
- ट्रांसजेंडर के लिए समावेशी सामाजिक कल्याण योजना
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी सहायता और जागरूकता
3- नारी भागीदारी
इस पहल के तहत, व्यापक जागरूकता के लिए लिंग-आधारित मुद्दों पर ऑनलाइन कार्यशालाएं और वेबिनार आयोजित किए गए,जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में कानून संबंधी जानकारी बढ़ी और नागरिकों को जानकारी देकर समर्थ बनाया गया। नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु, विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज,नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से संबंधित विभिन्न विषयों पर ग्राम स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
देखा जाये तो, हमारा संविधान-हमारा सम्मान” अभियान, और उसके बाद हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान अभियान, भारत में सबसे व्यापक संवैधानिक जन जागरण पहलों में से एक हैं। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बढ़ावा देते हुए, यह अभियान औपचारिक आयोजन से आगे बढ़कर संविधान और उसके मूल्यों के साथ जमीनी स्तर पर निरंतर संपर्क बनाने में सक्षम हुआ है।


