संसद ने विमान पट्टे और वित्त पोषण को बढ़ावा देने वाला विधेयक पारित किया

संसद ने ‘विमान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक को पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में पारित किया गया। यह भारत के विमानन क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य विमान पट्टे (लीजिंग) और वित्त पोषण की प्रक्रिया को सरल बनाना और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

यह विधेयक ‘केप टाउन कन्वेंशन, 2001’ के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसे भारत ने 2008 में अपनाया था। हालांकि, प्रभावी कानूनी सुरक्षा की कमी के कारण भारत में विमान पट्टे की लागत अन्य देशों की तुलना में 8 से 10 प्रतिशत अधिक थी। नया कानून इन कमियों को दूर करेगा और विमान वित्त पोषण को अधिक सुरक्षित और किफायती बनाएगा। इससे भारतीय विमानन कंपनियों को सस्ती दरों पर लीजिंग की सुविधा मिलेगी और उनकी परिचालन लागत कम होगी।

वहीं नागरिक उड्डयन मंत्री ने भारत के विमानन क्षेत्र में हुई तेज वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 2014 में भारत में प्रति वर्ष 10.38 करोड़ लोग हवाई यात्रा करते थे, जो 2024 तक बढ़कर 22.81 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में देश में हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 159 हो गई है, और जल्द ही दो और हवाई अड्डे शुरू किए जाएंगे। साथ ही, 2014 में भारत में 340 विमान थे, जो 2024 तक बढ़कर 840 हो गए हैं।

विधेयक के पारित होने के बाद भारत के विमानन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नए एयरलाइंस को बाजार में प्रवेश करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, सरकार ने विमानन ईंधन (ATF) की ऊंची कीमतों को लेकर भी चिंता जताई, जो एयरलाइनों के कुल खर्च का लगभग 45% होता है। मंत्री ने राज्यों से अनुरोध किया कि वे एटीएफ पर टैक्स कम करें ताकि हवाई यात्रा अधिक सुलभ और किफायती हो सके।

भारत सरकार विमानन क्षेत्र में स्थिरता और क्षमता विस्तार पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। 2025 तक 2.5 करोड़ लीटर ‘सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल’ (SAF) के उत्पादन की योजना बनाई गई है, जिससे हवाई यात्रा को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकेगा। इसके अलावा, 100 से अधिक हवाई अड्डों को नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने आने वाले वर्षों में पायलटों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी रणनीति बनाई है। अगले 10 से 15 वर्षों में भारत को 30,000 से 34,000 प्रशिक्षित पायलटों की जरूरत होगी। इसे देखते हुए सरकार फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) की संख्या बढ़ा रही है और अधिक पायलट लाइसेंस जारी करने पर जोर दे रही है।

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