केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करना सुनिश्चित करें। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संबंधित नियामक प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। इस कदम का उद्देश्य मरीजों को इलाज की संभावित लागत की स्पष्ट जानकारी देना, उन्हें सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना और बिल से जुड़े विवादों को कम करना है।
मरीजों और परिजनों को आसानी से मिले शुल्क की जानकारी
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की दरों का स्पष्ट और प्रमुख स्थान पर प्रदर्शन मरीजों और उनके परिवारों को उपचार की संभावित लागत समझने तथा चिकित्सा खर्च की बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा। शुल्क संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध होने से अनावश्यक भ्रम और बिलिंग विवादों को कम करने के साथ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में दरें प्रदर्शित करना जरूरी
पत्र में नैदानिक प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 और नैदानिक प्रतिष्ठान (केंद्रीय सरकार) नियम, 2012 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। इन नियमों के तहत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जहां यह अधिनियम लागू है, नैदानिक प्रतिष्ठानों के लिए प्रत्येक प्रकार की सेवा और उपलब्ध सुविधाओं की दरें मरीजों और उनके परिचारकों की सुविधा के लिए प्रमुख स्थान पर स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
जहां अधिनियम लागू नहीं, वहां राज्य के नियम होंगे प्रभावी
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम लागू नहीं है, वहां चिकित्सा संस्थान संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नियामक ढांचे के तहत संचालित होते हैं। इनमें से कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रदर्शित करने से संबंधित प्रावधान पहले से मौजूद हैं।
अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्यों की
केंद्र ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और लागू नियामक प्रावधानों का कार्यान्वयन एवं प्रवर्तन संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य सचिव ने मुख्य सचिवों से संबंधित अधिकारियों के माध्यम से इन प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
विदेशी मरीजों के लिए पैकेज दरें भी प्रदर्शित हों
मंत्रालय ने मेडिकल और आयुष वीजा पर भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में पारदर्शिता पर भी जोर दिया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि जहां लागू हो, वहां विदेशी मरीजों को उपलब्ध कराए जाने वाले उपचार पैकेज की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
मेडिकल टूरिज्म में भारत की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर
मंत्रालय के मुताबिक, पैकेज दरों की स्पष्ट जानकारी से अंतरराष्ट्रीय मरीजों को उपचार के संबंध में सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। साथ ही कीमत और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को कम करने में भी सहायता मिलेगी। इससे चिकित्सा और आयुष उपचार के लिए भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक गंतव्य के रूप में मजबूत करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिवों से व्यक्तिगत ध्यान देने का आग्रह
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मुख्य सचिवों से इस विषय पर व्यक्तिगत ध्यान देने और संबंधित अधिकारियों तथा नैदानिक प्रतिष्ठानों को आवश्यक कार्रवाई के लिए उचित निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। इसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि लागू नियमों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं की दरें स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले और आसानी से सुलभ स्थानों पर प्रदर्शित की जाएं।
पारदर्शी और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में कदम
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्य सेवा वितरण को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मरीजों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्पष्ट शुल्क संबंधी जानकारी तक मरीजों की पहुंच को रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। (इनपुट: पीआईबी)


