केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में देश की पेंशन व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है और यह नियम-पुस्तिका आधारित प्रणाली से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी-सक्षम, जन-केंद्रित तंत्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब पेंशनभोगियों की गरिमा, पारदर्शिता और जीवन सुगमता सुनिश्चित करने पर है।
16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत की अध्यक्षता
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशनभोगियों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पेंशन प्रशासन को अधिक सरल, सहानुभूतिपूर्ण और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार काम किया है।
मौके पर समाधान की व्यवस्था बनी पेंशन अदालत की खासियत
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी हितधारक एक साझा मंच पर बैठकर मामलों का त्वरित समाधान करते हैं। इससे केवल फाइलों और पत्राचार तक सीमित रहने वाली प्रक्रिया से आगे बढ़कर व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण विकसित हुआ है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस अदालत में 37 मंत्रालयों और विभागों से जुड़े 985 लंबित पेंशन मामलों पर सुनवाई की गई। इनमें से 728 मामलों यानी लगभग 74% मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
26 महत्वपूर्ण मामलों पर हुई विशेष सुनवाई
कार्यवाही के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह के समक्ष 16 मंत्रालयों और विभागों से जुड़े 26 महत्वपूर्ण मामले प्रस्तुत किए गए। इनमें रक्षा मंत्रालय के 12, गृह मंत्रालय के 8 और रेल मंत्रालय के 2 मामले शामिल थे। अन्य मामले विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से संबंधित थे।
देशभर के पेंशनभोगियों ने लिया हिस्सा
पेंशन अदालत में आठ पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जबकि 18 अन्य पेंशनभोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े। इनमें महाराष्ट्र के अकोला, उत्तराखंड के हल्द्वानी, हिमाचल प्रदेश के मंडी, राजस्थान के बीकानेर, कोलकाता और तमिलनाडु के इरोड सहित कई शहरों के लाभार्थी शामिल रहे।
करोड़ों पेंशनभोगियों को डिजिटल सुधारों से लाभ
डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सुधारों ने वृद्ध पेंशनभोगियों की कठिनाइयों को काफी कम किया है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक पेंशनभोगी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्रणाली से लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे पेंशन वितरण अधिक पारदर्शी और सुगम बना है।
पारिवारिक पेंशन नियमों में भी हुए बड़े बदलाव
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने पारिवारिक पेंशन नियमों को सरल बनाया है। इसके अलावा गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े पुराने प्रावधानों को हटाने, तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों के मामलों में प्रक्रियात्मक राहत देने तथा दिव्यांग आश्रितों के लाभों में सुधार जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
मिशन कर्मयोगी के तहत समाधान आधारित प्रशासन पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत प्रशासन को केवल नियमों की यांत्रिक व्याख्या तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि लोगों को समय पर राहत मिल सके।
उन्होंने बताया कि 2017 में पेंशन अदालत की शुरुआत के बाद से अब तक 15 अदालतों में 27,812 मामलों की सुनवाई की गई है, जिनमें से 19,948 मामलों का समाधान किया जा चुका है। यह 71.72% से अधिक की सफलता दर दर्शाता है।
सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर बल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभागों और संगठनों से सोशल मीडिया तथा आधुनिक संचार माध्यमों का अधिक उपयोग करने की अपील की, ताकि देशभर के पेंशनभोगी सरकारी पहलों और शिकायत निवारण तंत्र से जुड़े रह सकें। (इनपुट: पीआईबी)


