मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स जिले के मावलंगविर गांव में पाइन होम इको-सस्टेनेबल प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से विकसित यह परियोजना टिकाऊ और समुदाय आधारित विकास का आदर्श मॉडल बन सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक नवाचार
संगमा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित रखते हुए आधुनिक नवाचार को बढ़ावा देना है। पाइन होम परियोजना में प्राकृतिक हीटिंग सिस्टम, पुनर्चक्रित सामग्री के इस्तेमाल और वर्षा जल संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर भी तैयार होंगे।
स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के निर्माण में स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अधिकांश निर्माण सामग्री भी स्थानीय स्तर पर जुटाई गई। इससे स्थानीय कौशल को संरक्षित करने के साथ परियोजना से होने वाले आर्थिक लाभ को समुदाय के भीतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
5.90 करोड़ रुपए की लागत से विकसित हुई परियोजना
करीब 5.90 करोड़ रुपए की लागत से सैत्सनात मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से पाइन होम परियोजना विकसित की गई है। इसमें रेस्तरां, सामुदायिक भवन, सम्मेलन एवं प्रशिक्षण सुविधाएं, अतिथि कक्ष और पर्यटन सूचना केंद्र शामिल हैं।
दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स को पर्यटन केंद्र बनाने का लक्ष्य
संगमा ने कहा कि राज्य सरकार दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाना चाहती है, जहां पर्यटक अधिक समय तक ठहरें और स्थानीय अर्थव्यवस्था में ज्यादा योगदान दें। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और समुदायों को केंद्र में रखकर पर्यटन को बढ़ावा देने से क्षेत्र में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
2028 तक 3,000 होमस्टे का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सीएम होमस्टे मिशन का भी उल्लेख किया। इसके तहत सरकार का लक्ष्य 2028 तक मेघालय में 3,000 होमस्टे स्थापित करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ स्थानीय परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
त्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम का भी उद्घाटन
संगमा ने मावसिनराम स्थित त्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि पाइन होम और त्वाहलोंगवार जैसी परियोजनाएं शिलांग से बाहर भी विकास पहुंचाने की सरकार की नीति को दर्शाती हैं।
तीनों पहाड़ी क्षेत्रों के संतुलित विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गारो हिल्स, खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स को साथ-साथ आगे बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों और प्राकृतिक परिवेश पर आधारित परियोजनाओं के माध्यम से इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
पाइन होम ‘जीवंत प्रयोगशाला’ और त्वाहलोंगवार ‘जीवंत कक्षा’
सीएम संगमा ने पाइन होम को एक ‘जीवंत प्रयोगशाला’ और त्वाहलोंगवार को एक ‘जीवंत कक्षा’ बताया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्राप्त अनुभवों का इस्तेमाल भविष्य में जलवायु-अनुकूल स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, इको-लॉज और होमस्टे के विकास में किया जा सकता है।
शोध और समुदाय की जड़ों से जुड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अनुसंधान अनुदान योजना का भी उल्लेख किया। इसके पहले वर्ष में 48 शोधार्थियों को सहायता दी गई है। वहीं ‘ट्रेसिंग द रूट्स’ पहल के तहत 75 शोधार्थी खासी, जयंतिया और गारो समुदायों की उत्पत्ति तथा ऐतिहासिक यात्रा का अध्ययन करने के लिए वियतनाम, कंबोडिया और तिब्बत का दौरा करेंगे।
अतीत की समझ से भविष्य की राह
संगमा ने कहा कि जो समाज अपने अतीत और अपनी जड़ों को जानता है, वह भविष्य की ओर अधिक आत्मविश्वास के साथ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सतत पर्यटन, स्थानीय ज्ञान, शोध और समुदाय की भागीदारी के जरिए मेघालय के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। (इनपुट: आईएएनएस)


