पीयूष गोयल ने ईएईयू व्यापार मंत्री से की बातचीत, फार्मा-ऑटो समेत प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के व्यापार मंत्री आंद्रेई स्लेपनेव से मुलाकात कर प्रस्तावित भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत में तेजी लाने, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और बाजार पहुंच का विस्तार करने के तरीकों पर चर्चा की। बैठक में फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल समेत प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

एफटीए वार्ता में तेजी लाने पर जोर

स्लेपनेव के साथ बैठक के बाद गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-ईएईयू एफटीए वार्ता को तेज करने, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और बाजार पहुंच का विस्तार करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करने तथा व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर भी विचार किया गया।

फार्मा, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल पर फोकस

बैठक में फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों को विशेष रूप से चर्चा के केंद्र में रखा गया। इन क्षेत्रों में बाजार पहुंच बढ़ाने से भारत और ईएईयू देशों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

पांच देशों का संगठन है ईएईयू

आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस ईएईयू के सदस्य हैं। भारत और ईएईयू व्यापार तथा बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। एफटीए के जरिए दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को और सुगम बनाने का लक्ष्य है।

निर्यात बढ़ाने की रणनीति के बीच अहम पहल

ईएईयू एफटीए वार्ता में तेजी लाने की पहल ऐसे समय में हुई है, जब भारत अपने व्यापार समझौतों के नेटवर्क का विस्तार करने और निर्यात को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर रहा है। सरकार विभिन्न प्रमुख बाजारों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

भारत-ईयू एफटीए को भी जल्द लागू करने की तैयारी

इस महीने की शुरुआत में गोयल ने कहा था कि यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश भारत-ईयू एफटीए का समर्थन करते हैं और समझौते को जल्द से जल्द लागू करने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समझौते पर कुशलतापूर्वक बातचीत की गई है और भारत या ईयू में इसे लेकर कोई असहमति नहीं है।

श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिल सकता है लाभ

भारत-ईयू समझौते से मछली पालन, कपड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। समझौता लागू होने के बाद रसायन और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्यात में भी बढ़ोतरी की संभावना है।

863.1 अरब डॉलर रहा भारत का कुल निर्यात

सरकार की अगस्त में जारी फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु एवं सेवा निर्यात रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात शामिल है। ऐसे में ईएईयू समेत प्रमुख वैश्विक बाजारों के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाना भारत के निर्यात विस्तार की रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट: आईएएनएस)

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