केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने द्वारका नई दिल्ली में बौद्धिक संपदा कार्यालय (आईपीओ) के नव-विस्तारित आईएसए भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान, पीयूष गोयल ने कहा कि नवाचार सदियों से भारत की पहचान का अभिन्न अंग रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। कोणार्क मंदिर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक संरचनाओं की सटीकता और इंजीनियरिंग, देश में हज़ारों वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही नवाचार की गहरी संस्कृति को दर्शाती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नवाचार न केवल बौद्धिक संपदा का एक रूप है, बल्कि संप्रभुता का प्रतीक भी है, और यह भारत को विश्व में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कल बुधवार को बताया कि प्रत्येक विकसित देश में नवाचार, नए विचार, अनुसंधान और विकास प्राथमिकता रहे हैं और इसी पर ध्यान केंद्रित करने से उनकी समृद्धि हुई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश का विकास नवाचार के कंधों पर टिका है और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को अब दुनिया भर में विकास के एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में मान्यता मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी हितधारक अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से पालन करें, तो यह संस्थान 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की यात्रा का केंद्र बन जाएगा और अनुसंधान एवं विकास के लिए एक आधारशिला के रूप में कार्य करेगा।
वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की प्रगति उल्लेखनीय है, बौद्धिक संपदा का विकास बहुत अच्छी तरह से हो रहा है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और सेमीकंडक्टर के लिए एक प्रतिभा केंद्र बन जाएगा।
यह उद्घाटन भारत के बौद्धिक संपदा ढांचे को मज़बूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पेटेंट सहयोग संधि (पीसीटी) के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय खोज प्राधिकरण (आईएसए) और अंतर्राष्ट्रीय प्रारंभिक जाँच प्राधिकरण (आईपीईए) के रूप में भारत की भूमिका को मज़बूत करने के लिए, 2014 में एक आईएसए/आईपीईए भवन का निर्माण किया गया था, जिसमें भूतल और प्रथम तल शामिल हैं। भारतीय बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र में अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुए, सरकार ने 2018 में एक विस्तारित भवन के निर्माण को मंज़ूरी दी। राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) द्वारा शुरू की गई यह परियोजना 2025 में पूरी होनी थी।
इस विस्तार में मौजूदा आईएसए भवन का नवीनीकरण और दूसरी से सातवीं मंजिल तक पांच नई मंजिलें जोड़ना शामिल है, जिससे कुल निर्मित क्षेत्रफल बढ़कर 140,120 वर्ग फुट हो गया है। पुराने 6,082 वर्ग फुट के आईपीओ भवन में पहले 200 लोगों के रहने की क्षमता थी, जबकि अब यह सुविधा 700 से ज़्यादा लोगों को समायोजित कर सकती है।
लगभग ₹88 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में कार्यस्थल को अधिकतम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक वास्तुशिल्प डिज़ाइन का इस्तेमाल किया गया है।
भूतल और प्रथम तल पर प्रशासनिक और पेशेवर टीमें स्थित हैं, जिनमें पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (CGPDTM) का कार्यालय भी शामिल है। दूसरी से छठी मंजिलों पर पेटेंट, डिज़ाइन, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क से जुड़े अधिकारियों के लिए समर्पित कार्यस्थल, साथ ही परीक्षा कक्ष, तकनीकी और कानूनी अनुभाग और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रभाग भी हैं।
सातवीं मंजिल पर एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र है, जिसमें पांच पूरी तरह सुसज्जित प्रशिक्षण कक्ष, उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी और आईपी पेशेवरों और हितधारकों की क्षमता निर्माण के लिए आधुनिक डिजिटल उपकरण उपलब्ध हैं।
इसके अतिरिक्त, इस भवन में सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप वर्षा जल संचयन, एक सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) और संयंत्र अपशिष्ट अपघटक जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं।
इन सुविधाओं से रखरखाव लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और समग्र सेवा वितरण में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक बौद्धिक संपदा प्रशासन में भारत की स्थिति मज़बूत होगी।


