पीयूष गोयल ने राष्ट्रीय रणनीतिक व्यापार कमान केंद्र का किया शुभारंभ, निर्यात अवसरों की पहचान होगी आसान

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में राष्ट्रीय रणनीतिक व्यापार कमान केंद्र (एनएसटीसीसी) का उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य डेटा-आधारित निगरानी, व्यापार संबंधी खुफिया जानकारी और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। इसके माध्यम से उत्पाद और बाजार के स्तर पर व्यापार का विश्लेषण करने, निर्यात के नए अवसरों की पहचान करने तथा वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) लव अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

डेटा आधारित व्यापारिक निर्णयों पर जोर

पीयूष गोयल ने डेटा-आधारित और साक्ष्य-आधारित व्यापारिक निर्णय लेने में एनएसटीसीसी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से ‘स्कोमेट’ (विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकियां) डैशबोर्ड की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने लंबित आवेदनों के निपटारे में तेजी लाने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और आवश्यकता पड़ने पर साप्ताहिक बैठकें करने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य आवेदनों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना है।

व्यापार निगरानी के लिए विकसित किया गया कमान केंद्र

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने एनएसटीसीसी को एक रणनीतिक पहल के रूप में विकसित किया है। इसका उद्देश्य एकीकृत डेटा विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया के जरिए भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार तंत्र की निगरानी, विश्लेषण और प्रशासन को मजबूत करना है। यह केंद्र वरिष्ठ नीति निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों को व्यापार प्रदर्शन, निर्यात संवर्धन योजनाओं, नियामक मंजूरियों, आवेदन प्रक्रिया और परिचालन संकेतकों की एकीकृत जानकारी उपलब्ध कराएगा।

एक ही मंच पर मिलेंगे व्यापार से जुड़े आंकड़े

एनएसटीसीसी विभिन्न व्यापार संबंधी डिजिटल प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों को एक मंच पर एकत्रित करेगा। इससे व्यापार के उभरते रुझानों, प्रशासनिक बाधाओं और नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। केंद्र में एकीकृत विश्लेषण एवं विजुअलाइजेशन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो व्यापार संबंधी आंकड़ों को उपयोगी जानकारियों में बदलने में मदद करेगा। इसके तहत प्रमुख व्यापार संकेतकों, योजनाओं के प्रदर्शन, लंबित आवेदनों, प्रसंस्करण समयसीमा, क्षेत्रीय रुझानों और अनुपालन संबंधी मानकों को प्रदर्शित करने वाले इंटरैक्टिव डैशबोर्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

उत्पाद, बाजार और क्षेत्रीय स्तर पर होगा विश्लेषण

यह प्लेटफॉर्म निर्धारित भूमिका के अनुसार अधिकृत उपयोगकर्ताओं को राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शन, क्षेत्रीय प्राधिकरणों, योजनाओं, उत्पादों, गंतव्य बाजारों और व्यक्तिगत आवेदनों के स्तर पर आंकड़ों का विश्लेषण करने की सुविधा देगा। इससे अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन की तुलना करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

डीजीएफटी की प्रमुख योजनाएं होंगी निगरानी के दायरे में

एनएसटीसीसी के शुरुआती चरण में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के प्रमुख कार्यों और व्यापार संबंधी प्रक्रियाओं के डैशबोर्ड को शामिल किया गया है। इनमें आयात-निर्यात कोड (आईईसी), अग्रिम प्राधिकरण, निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (ईपीसीजी) योजना, उत्पत्ति प्रमाणपत्र, स्कोमेट, प्रतिबंधित आयात-निर्यात और अन्य नियामक प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन डैशबोर्ड के माध्यम से क्षेत्रीय प्राधिकरणों में योजनाओं के उपयोग, आवेदन निपटान की दक्षता, निर्यात दायित्वों, व्यापार पैटर्न और परिचालन प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी।

तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है व्यवस्था

एनएसटीसीसी को व्यापार प्रशासन के तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग देने के लिए तैयार किया गया है।

  •  एकीकृत निगरानी: व्यापार रुझानों, आवेदन प्रक्रिया, लंबित मामलों और उभरते जोखिमों की जानकारी एक साथ उपलब्ध कराना, ताकि परिचालन संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सके।
  •  प्रदर्शन मूल्यांकन: निर्धारित प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर योजनाओं, प्रक्रियाओं और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के कामकाज का मूल्यांकन करना तथा सुधार के अवसरों की पहचान करना।
  •  साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव: बार-बार सामने आने वाली बाधाओं, प्रक्रियात्मक जटिलताओं और व्यापार के बदलते रुझानों का विश्लेषण कर नीतियों को सरल बनाने तथा व्यापार सुगमता बढ़ाने में मदद करना।

निर्यात अवसरों और व्यापार समझौतों का आकलन

यह केंद्र उत्पाद-वार और बाजार-वार व्यापार विश्लेषण के साथ व्यापार समझौतों के उपयोग का आकलन करने में भी मदद करेगा। इसके माध्यम से संभावित निर्यात बाजारों और नए अवसरों की पहचान की जा सकेगी। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की व्यापार स्थिति पर नजर रखने और देश की व्यापार संबंधी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

मौजूदा डिजिटल प्रणालियों से जुड़ेगा केंद्र

एनएसटीसीसी को डीजीएफटी की मौजूदा प्रणालियों और ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म’ सहित डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग करने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत भविष्य में अन्य सरकारी विभागों और व्यापार से संबंधित एजेंसियों के आंकड़ों को भी चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जा सकेगा आगे चलकर इसे एक व्यापक सरकारी निर्णय-सहायता तंत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत संबंधित मंत्रालयों, राज्यों, निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य अधिकृत संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से इससे जोड़ा जाएगा। स्वचालित अलर्ट, अतिरिक्त डेटा और उन्नत विश्लेषण तकनीकों के जरिए इसकी क्षमताओं को भी बढ़ाया जाएगा।

व्यापार प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने की पहल

एनएसटीसीसी की शुरुआत सक्रिय, पारदर्शी और जवाबदेह व्यापार प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे वाणिज्य विभाग और डीजीएफटी को केवल समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करने के बजाय निरंतर निगरानी, समन्वित कार्रवाई और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। यह पहल डिजिटल तकनीकों और डेटा-आधारित शासन के माध्यम से व्यापार सुगमता बढ़ाने, प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार करने और वैश्विक बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। (इनपुट: पीआईबी)

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