भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के विकास में बदलावकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इजराइल के लोगों में भी प्रधानमंत्री मोदी के प्रति काफी सम्मान और लोकप्रियता है। यरुशलम में इजरायली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण सत्र में इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को याद करते हुए अजार ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में यह बात कही।
भारत के विकास में मोदी की अहम भूमिका
रूवेन अजार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका भारत के विकास में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भारत में रहते हुए विकास के आंकड़ों, युवा पीढ़ी के सशक्तीकरण, अर्थव्यवस्था की विकास दर, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुधारों को देखने पर यह बदलाव स्पष्ट नजर आता है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के लिए पहले से कहीं अधिक खुल रहा है।
इजराइल में प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान
अजार ने कहा कि इजराइल के लोग प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अन्य देशों की तरह इजराइल में भी प्रधानमंत्री मोदी को बेहद सम्मान और लोकप्रियता हासिल है। उन्होंने भारत और इजराइल के बीच बढ़ते संबंधों के संदर्भ में भी प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
होर्मुज को लेकर ईरान पर निशाना
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम सोमवार को खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान वाशिंगटन के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह के समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसे वह जरूरी मानते हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान और ओमान स्ट्रेट में समुद्री यातायात के नए मार्ग के नक्शे पर सहमत हो गए हैं।
ईरान का कदम नासमझी भरा: अजार
रूवेन अजार ने कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और होर्मुज स्ट्रेट में अपनी गतिविधियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय तथा अमेरिका से जबरन वसूली करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह ईरान की तरफ से बेहद नासमझी भरा कदम है, क्योंकि कई देश पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करने वाली पाइपलाइन बनाने में जुटे हैं।
कई वैकल्पिक पाइपलाइन परियोजनाओं का जिक्र
अजार ने कहा कि इराक से तुर्किए और सीरिया होते हुए भूमध्य सागर तक 60 अरब डॉलर की पाइपलाइन बनाने की खबर सामने आई है। इसके अलावा सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में एक अन्य पाइपलाइन की योजना है, जो इराक से सीधे संयुक्त अरब अमीरात तक जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात में भी एक पाइपलाइन को अपग्रेड किया जा रहा है। अजार ने कहा कि ऐसे में ईरान के कदम से कोई वास्तविक विकल्प नहीं निकलेगा और न ही इससे वह सैन्य तथा आर्थिक मोर्चों पर मिली बड़ी हार को छिपाने में सफल होगा।
सऊदी-तुर्किए-पाकिस्तान समझौते पर नजर
तेल अवीव के कई सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्किए के साथ हाल में हुए पारस्परिक रक्षा समझौते को इजराइल और भारत के खिलाफ व्यापक एकजुट मुस्लिम मोर्चे में बदलने की कोशिश की है। हालांकि, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब पर ईरान के संभावित हमले को रोकना था। तुर्किए के विदेश मंत्री ने इस सामूहिक रक्षा समझौते की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से भी की है।
समझौते के निहितार्थों पर जल्दबाजी नहीं
अजार ने कहा कि 7 अगस्त को मक्का में हुए संयुक्त रक्षा समझौते के निहितार्थों का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और तुर्किए के बीच पहले भी तनाव रहा है और कुछ वर्ष पहले जमाल खशोगी मामले तथा मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति का संबंध मुख्य रूप से ईरान से बढ़ते खतरे और सऊदी अरब पर ईरान के एकतरफा हमले से है।
पाकिस्तान की सैन्य भूमिका पर संशय
अजार ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान इस मामले में सैन्य रूप से शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कूटनीतिक भूमिका निभाई है, लेकिन यह भूमिका बहुत सफल नहीं रही। उनके अनुसार, कुछ महीने पहले हस्ताक्षर किए गए समझौते को ईरान ने तोड़ दिया और आईआरजीसी ने समझौते के विपरीत स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि अब यह देखना बाकी है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में किसी पक्ष के लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता है। (इनपुट: आईएएनएस)


