प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सुभाषित में श्रीदुर्गासप्तशती का एक महत्वपूर्ण संस्कृत श्लोक साझा किया है। उन्होंने लिखा, “सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”इस श्लोक का हिंदी अर्थ है— “हे मां नारायणी! आप समस्त मंगलों में परम मंगलमयी हैं। आप कल्याणस्वरूपा हैं तथा समस्त पुरुषार्थों और मनोरथों को सिद्ध करने वाली हैं। आप शरणागतों की रक्षा करने वाली, त्रिनेत्रधारिणी एवं गौरवर्णा मां गौरी हैं। हे जगज्जननी! आपको मेरा सादर नमन है।”
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नवरात्रि में इस श्लोक का विशेष महत्व
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया यह श्लोक विशेष रूप से नवरात्र और देवी उपासना के दौरान श्रद्धा व भक्ति के साथ उच्चारित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसके नियमित जप से मां दुर्गा की असीम कृपा, आशीर्वाद और दिव्य संरक्षण प्राप्त होता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
क्या है दुर्गा सप्तशती?
दुर्गा सप्तशती को ‘देवी माहात्म्य’ या ‘चंडी पाठ’ भी कहा जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की है। इस ग्रंथ में 13 अध्याय और कुल 700 श्लोक हैं। ‘सप्त’ का अर्थ सात और ‘शत’ का अर्थ सौ होता है, इसलिए इसे सप्तशती कहा जाता है। इसमें महिषासुर जैसे राक्षसों पर मां दुर्गा की विजय का विस्तार से वर्णन है। सही पाठ के लिए विशिष्ट विधि का पालन किया जाता है, जिसमें त्र्यंगम और नवांगम शामिल हैं। भक्त इसे नवरात्रि के दौरान या एक, तीन अथवा सात बैठकों में श्रद्धापूर्वक पूरा करते हैं।
पाठ के लाभ और विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन या नवरात्रि में विधि-विधान के साथ पाठ करने से अनेक आध्यात्मिक और व्यक्तिगत लाभ मिलते हैं। पाठ शुद्धता और पारंपरिक विधि के साथ करना आवश्यक है। इसे एक दिन में या नौ दिनों में पूरा किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पावन श्लोक को साझा करना नवरात्रि के दौरान देवी आराधना की भावना को और मजबूत करता है। (इनपुट-एजेंसी)


