पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, बताया—’मानव जीवन की सच्ची सफलता दूसरों के कल्याण में’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर सुभाषित शेयर किया जिसमें उन्होंने संदेश दिया कि सदैव परोपकार एवं कल्याणकारी कर्म ही करें। प्राचीन संस्कृत सुभाषित के माध्यम से पीएम मोदी ने मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

उन्होंने लिखा कि इस संसार में प्राणियों का जन्म तभी सफल होता है, जब वे अपनी शारीरिक शक्ति, धन, बुद्धि और वाणी के माध्यम से लगातार दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करते रहें।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है—

“एतवज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु।
प्राणैरर्थैर्य वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥”

https://x.com/narendramodi/status/2089895127946809701?s=20

सुभाषित का भावार्थ

इस सुभाषित का भावार्थ है कि मानव जीवन की असली पूर्ति तभी होती है, जब व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता से अन्य जीवों के हित और भलाई के लिए निरंतर प्रयास करे। शरीर (प्राण), धन (अर्थ), बुद्धि और वाणी—इन सभी साधनों का उपयोग परोपकार और कल्याण के कार्यों में करना ही जन्म की सार्थकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदेश के माध्यम से समाज में परोपकार, सेवा और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया है। उनका यह संदेश उन सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में लगे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक्स पर “उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” श्लोक साझा किया था। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए। सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता न करे, बल्कि सत्य, धैर्य और आत्मगौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहे।

सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए लिखा गया था, “सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।” उन्होंने एक श्लोक, “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” भी साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि हम सबके संकल्प एक समान होने चाहिए, हमारे मन एकता के भाव से जुड़े होने चाहिए, जिससे हम सभी परस्पर सहयोग तथा समान व्यवहार के साथ समाज की उन्नति के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।

इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर 14 अगस्त को सुभाषित शेयर किया गया था। तब उन्होंने लिखा था, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।” (इनपुट-पीआईबी)

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