पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषितम् के जरिए दिया सफलता का मंत्र

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने उन्नति के मूल कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उद्यम, संयम, कुशलता, सावधानी, धैर्य, स्मृति और सोच-समझकर किसी भी कार्य को शुरू करना सफलता की बुनियाद है।

उन्नति के सात मूल सिद्धांत

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कुछ मूलभूत गुण बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्यम (परिश्रम), संयम, दक्षता, सावधानी, धैर्य, स्मरण शक्ति और विचारपूर्वक कार्य आरंभ करना—ये सभी मिलकर उन्नति का आधार बनाते हैं।

परिश्रम और समर्पण से मिलती है सफलता

पीएम मोदी ने कहा कि संयम और समर्पण के साथ किया गया कठिन परिश्रम व्यक्ति को असाधारण सफलता दिला सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे प्रयास न केवल व्यक्तिगत उन्नति में सहायक होते हैं, बल्कि राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

एक्स पर साझा किया सुभाषितम्

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- “संयम और समर्पण के साथ किया गया परिश्रम अद्भुत सफलता दे सकता है। इससे राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को भी एक नई ऊर्जा मिलती है।

उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृतिः स्मृतिः। समीक्ष्य च समारम्भो विद्धिमूलं भवस्य तु॥”

सुभाषित का भावार्थ

इस सुभाषित का अर्थ है कि उद्यम, संयम, कुशलता, सावधानी, धैर्य, स्मृति और सोच-समझकर किसी भी कार्य को आरंभ करना—ये सभी उन्नति के मूल कारण हैं। (इनपुट: पीआईबी)

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