पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर दिया संदेश- ‘विविधता नवाचार की सबसे बड़ी ताकत’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमवार को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में विविध विचारों, प्रतिभाओं और रचनात्मक दृष्टिकोणों के महत्व को रेखांकित किया है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की सोच, कार्यशैली और प्रतिभा अलग-अलग होती है और यही विविधता नए विचारों व संभावनाओं को जन्म देती है।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि जिस प्रकार विभिन्न स्रोतों से आने वाले जल का स्वाद अलग-अलग होता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति की प्रतिभा, दृष्टि और योगदान भी विशिष्ट होता है। उन्होंने कहा, “विविध विचारों और क्षमताओं के संगम से ही नवाचार, उद्यमिता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।”

सुभाषित और उसका अर्थ

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत का एक प्रसिद्ध सुभाषित साझा किया:

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।
जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”

अर्थ: प्रत्येक व्यक्ति की सोच और रचनात्मक दृष्टि अलग होती है तथा यही भिन्नता नवाचार की सबसे बड़ी शक्ति है। हर शरीर (व्यक्ति) में बुद्धि अलग होती है, हर कुण्ड में पानी नया होता है, हर जाति में नवाचार होते हैं और हर मुख में नई वाणी होती है।

प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित के माध्यम से स्पष्ट किया कि समाज में मौजूद विविध प्रतिभाएं, अलग-अलग पृष्ठभूमि और अनुभव ही विकास और प्रगति को नई दिशा देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की नवाचार संस्कृति भी इसी भावना पर आधारित है। यह पोस्ट प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें वे विविधता को राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा की मजबूत नींव मानते हैं।(इनपुट-एजेंसी)

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