पीएम मोदी ने रेखांकित की भारत की विकास यात्रा, सहकारी संघवाद से स्थिरता तक का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के लेख साझा किए, जिनमें भारत में संवाद और विश्वास के जरिए केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने तथा देश के स्थिरता और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने हिमंता बिस्वा सरमा के लेख को साझा करते हुए कहा कि संवाद विवादों की जगह ले रहा है, विश्वास केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ कर रहा है और विकास की प्रगति के नए रास्ते खोल रहा है। वहीं, हरीश साल्वे के लेख में भारत को उथल-पुथल भरे वैश्विक दौर में स्थिरता के द्वीप और विकास के इंजन के रूप में उभरता हुआ बताया गया है।

सहकारी संघवाद में बदलाव का विश्लेषण

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लेख में पिछले दशक में सहकारी संघवाद में आए बदलावों का विश्लेषण किया गया है। लेख में संवाद और विश्वास को केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने वाला आधार बताया गया है। इसमें कहा गया है कि आपसी विश्वास के जरिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ने से विकास और प्रगति के नए रास्ते खुल रहे हैं।

विश्वास के जरिए उपलब्धियों का उल्लेख

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लेख साझा करते हुए कहा कि यह पिछले दशक में सहकारी संघवाद में आए बदलावों का विश्लेषण करता है। उन्होंने इसे आत्म-निरीक्षण वाला लेख बताते हुए कहा कि इसमें इस बात पर विचार किया गया है कि देश ने कितनी प्रगति की है और विश्वास के बल पर क्या अर्जित किया है।

भारत को स्थिरता के द्वीप के रूप में बताया

प्रधानमंत्री ने हरीश साल्वे का लेख भी साझा किया। इसमें वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के दौर के बीच भारत के स्थिरता के द्वीप और विकास के इंजन के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला गया है। लेख में भारत की आर्थिक और रणनीतिक दिशा को देश की स्थिरता से जोड़कर देखा गया है।

स्थिर नेतृत्व और राजनीतिक निरंतरता का उल्लेख

हरीश साल्वे ने अपने लेख में भारत के इस उभार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थिर नेतृत्व और राजनीतिक निरंतरता को दिया है। लेख में कहा गया है कि राष्ट्रीय दिशा की स्पष्ट समझ ने भारत की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण को मजबूत किया है।

केंद्र-राज्य सहयोग को विकास का आधार

दोनों लेखों में अलग-अलग संदर्भों से भारत की विकास यात्रा में विश्वास और स्थिरता की भूमिका पर जोर दिया गया है। जहां असम के मुख्यमंत्री के लेख में केंद्र-राज्य संबंधों में संवाद और विश्वास को सहकारी संघवाद से जोड़ा गया है, वहीं हरीश साल्वे के लेख में राष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता, नेतृत्व और स्पष्ट दिशा को आर्थिक विकास तथा दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण से जोड़ा गया है।

विकास और राष्ट्र निर्माण पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए दोनों लेखों का केंद्रीय विषय विकास और राष्ट्र निर्माण है। एक लेख केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा विश्वास के जरिए विकास की संभावनाओं पर केंद्रित है, जबकि दूसरा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की स्थिरता और विकास क्षमता को रेखांकित करता है। (इनपुट: पीआईबी)

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