प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार को जापान के दो दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। वे 29 और 30 अगस्त को टोक्यो में होने वाले 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर बातचीत होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे।
यह दौरा इसलिए खास है क्योंकि पीएम मोदी सात साल बाद जापान के द्विपक्षीय दौरे पर जा रहे हैं। पिछली बार उन्होंने 2018 में वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका जापान का आठवां दौरा होगा। कार्यक्रम के तहत पीएम मोदी टोक्यो से बाहर भी जाएंगे और जापानी नेताओं, भारत समर्थकों और उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे। साथ ही वह भारत-जापान बिजनेस लीडर्स फोरम में भी शामिल होंगे ताकि व्यापार और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत किया जा सके।
गौरतलब है कि भारत-जापान के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। 2007 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारतीय संसद में मशहूर “Confluence of the Two Seas” भाषण दिया था। वहीं 2014 में प्रधानमंत्री आबे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बने थे। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग और बढ़ा है। मार्च 2022 में जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भारत आए और 5 ट्रिलियन येन (लगभग 42 अरब डॉलर) निवेश का वादा किया। इसी दौरे में 7 ऋण परियोजनाओं के लिए 300 अरब येन (2.7 अरब डॉलर) की सहमति बनी।
प्रधानमंत्री किशिदा मार्च 2023 में फिर भारत आए और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए 300 अरब येन (18,000 करोड़ रुपये या 2.2 अरब डॉलर) की सहायता पर हस्ताक्षर किए। वहीं पीएम मोदी ने मई 2023 में हिरोशिमा में जी7 शिखर सम्मेलन में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया और सितंबर 2023 में किशिदा भारत आए और जी20 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की चिंताओं पर चर्चा की।
पीएम मोदी और जापानी पीएम फुमियो किशिदा ने जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन (इटली) में मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे किए। वहीं अक्टूबर 2024 में मोदी और पीएम इशिबा आसियान शिखर सम्मेलन (लाओस) में मिले। सितंबर 2025 में वे क्वाड शिखर सम्मेलन (विलमिंगटन, अमेरिका) में भी साथ थे। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इशिबा ने मोदी को फोन कर संवेदना भी व्यक्त की थी। भारत और जापान का व्यापारिक रिश्ता भी मजबूत है। 2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार 22.8 अरब डॉलर तक पहुंचा। भारत जापान को रसायन, वाहन, एल्यूमिनियम और समुद्री उत्पाद निर्यात करता है, जबकि जापान से मशीनरी, स्टील, तांबा और रिएक्टर आयात करता है। 2024-25 के पहले नौ महीनों में व्यापार 21 अरब डॉलर रहा।
जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) स्रोत है। दिसंबर 2024 तक जापान का कुल निवेश 43.2 अरब डॉलर रहा। 2023-24 में जापान से भारत को 3.1 अरब डॉलर का निवेश मिला और अप्रैल-दिसंबर 2024 में 1.36 अरब डॉलर का निवेश हुआ। लगभग 1,400 जापानी कंपनियां भारत में 5,000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों के साथ काम कर रही हैं, जबकि 100 से अधिक भारतीय कंपनियां जापान में सक्रिय हैं।
जापानी कंपनियां भारत को लंबे समय के निवेश के लिए भरोसेमंद मानती हैं। अब दोनों देश नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर और स्टार्टअप्स, स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और कौशल विकास शामिल हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-जापान की दोस्ती को और गहरा करेगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देगा।


