राज्यसभा में पीएम मोदी का संबोधन, विदाई ले रहे सांसदों को दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान विदाई ले रहे सांसदों के योगदान की सराहना की और लोकतांत्रिक परंपराओं की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक “ओपन यूनिवर्सिटी” है, जहां से हर सदस्य सीखकर और समृद्ध होकर निकलता है।

दलगत राजनीति से ऊपर उठने का अवसर

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ऐसे अवसरों पर सदन में दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर एक समान भावना देखने को मिलती है। उन्होंने विदा हो रहे सांसदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजनीति में कभी “फुल स्टॉप” नहीं होता और अनुभव का उपयोग आगे भी राष्ट्र सेवा में होता रहता है।

वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को बताया प्रेरणास्रोत

प्रधानमंत्री ने एच. डी. देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका लंबा संसदीय अनुभव नए सांसदों के लिए सीखने का अवसर है। उन्होंने कहा कि दशकों तक संसदीय प्रणाली में सक्रिय रहकर इन नेताओं ने समर्पण और जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उपसभापति हरिवंश के कार्यों की सराहना

नरेन्द्र मोदी ने हरिवंश के योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने सदन को सुचारू रूप से चलाने, सभी का विश्वास जीतने और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हास्य और संवाद की परंपरा का जिक्र

सदन में बदलते माहौल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले हास्य और व्यंग्य के ज्यादा अवसर होते थे, लेकिन अब 24×7 मीडिया के कारण सदस्य अधिक सतर्क रहते हैं। उन्होंने रामदास अठावले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका हास्य और व्यंग्य सदन में हमेशा ऊर्जा बनाए रखता है।

‘सेकेंड ओपिनियन’ को बताया लोकतंत्र की ताकत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने द्विसदनीय संसदीय प्रणाली की अहमियत बताते हुए कहा कि एक सदन में लिए गए निर्णय दूसरे सदन में “सेकेंड ओपिनियन” के रूप में आते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया और अधिक समृद्ध होती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और बेहतर फैसलों का मार्ग प्रशस्त करती है।

पुराने और नए संसद भवन से जुड़ी विशेष स्मृतियां

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विदाई ले रहे कई सांसद ऐसे हैं जिन्हें पुराने और नए दोनों संसद भवनों में काम करने का अवसर मिला। यह उनके सार्वजनिक जीवन की एक विशेष और यादगार उपलब्धि है।

संसद को बताया ‘ओपन यूनिवर्सिटी’

मोदी मोदी ने संसद को “ओपन यूनिवर्सिटी” बताते हुए कहा कि यहां से सांसदों को राष्ट्र जीवन की बारीकियों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि संसद में बिताए गए वर्षों के दौरान न केवल देश के लिए योगदान होता है, बल्कि व्यक्ति के अनुभव और क्षमता में भी कई गुना वृद्धि होती है।

सभी सांसदों को दी शुभकामनाएं

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी विदाई ले रहे सांसदों के योगदान की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका अनुभव आगे भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। (इनपुट: पीआईबी)