राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा, पीएम ने कहा-जो गरीबों की झोपड़ियों में फोटो सेशन कराते हैं, उन्हें संसद में गरीबों की बात बोरिंग ही लगेगी

मंगलवार को पीएम मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि देश की जनता ने मुझे 14वीं बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने का मौका दिया है।

इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को ‘बोरिंग’ बताने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर तंज कसा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग अपने मनोरंजन के लिए गरीबों की झोपड़ियों में फोटो सेशन कराते हैं, उन्हें संसद में गरीबों की बात बोरिंग ही लगेगी। उन्होंने कहा कि हमने गरीब को झूठे नारे नहीं, सच्चा विकास दिया है। गरीब का दुख, सामान्य मानवी की तकलीफ, मीडिल क्लास के सपने ऐसे ही नहीं समझे जाते हैं, इसके लिए जज्बा चाहिए। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ लोगों में यह है ही नहीं।
इसके बाद पीएम मोदी ने शीशमहल का जिक्र करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को भी निशाने पर लिया।उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का फोकस आलीशान घरों में जकूजी और शॉवर पर है। कुछ नेताओं का फोकस अपने घर के स्टाइलिश बाथरूम पर है। हमारा फोकस तो ‘हर घर नल से जल’ पहुंचाने पर है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हम 2025 में हैं। एक तरह से 21वीं सदी का 25 प्रत‍िशत हिस्सा बीत चुका है। आजादी के बाद 20वीं सदी और 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में क्या हुआ, यह तो समय ही तय करेगा। लेकिन अगर हम राष्ट्रपति के अभिभाषण का सूक्ष्मता से अध्ययन करें, तो यह स्पष्ट है कि उन्होंने आने वाले 25 वर्षों और विकसित भारत को लेकर लोगों के बीच विश्वास कायम करने की बात कही। उनका संबोधन विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करता है, नया आत्मविश्वास पैदा करता है और आम लोगों को प्रेरित करता है।

पांच दशक तक हम गरीबी हटाओ के नारे सुनते रहे। आज 25 करोड़ गरीब गरीबी को परास्त कर उससे ऊपर उठ गए हैं। ये अचानक नहीं हुआ है। ये योजनाबद्ध तरीके से हुआ है, समर्पित प्रयासों के कारण हुआ है, गरीबों के संघर्ष के प्रति गहरी संवेदनशीलता के कारण हुआ है। जब कोई गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करता है, तो ऐसे परिणाम मिलते हैं। जो लोग जमीन से जुड़े होते हैं, जो इसकी वास्तविकताओं को समझते हैं और इसके लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, वे निश्चित रूप से बदलाव लाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हमने गरीबों को सिर्फ खोखले नारे नहीं दिए, हमने असली विकास किया। गरीबों के संघर्ष, आम आदमी की कठिनाइयों और मध्यम वर्ग की चुनौतियों को समझने के लिए सच्ची प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। दुख की बात है कि कुछ लोगों में यह सब नहीं है। जो लोग झुग्गी-झोपड़ियों में फोटो सेशन कराकर अपना मनोरंजन करते रहते हैं, उन्हें संसद में गरीबों पर चर्चा बोरिंग लगेगी।

फूस की और प्लास्टिक की कच्ची छत के नीचे जीवन गुजारना कितना मुश्किल होता है। कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जब सपने रौंद दिए जाते हैं और ये हर कोई नहीं समझ सकता है। अब तक गरीबों को चार करोड़ पक्के घर मिले हैं। जिसने उस जिंदगी को जिया है, उसे समझ होती है कि पक्की छत वाला घर क्या होता है।

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