79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस हर भारतीय के लिए गर्व के क्षण हैं, जो हमें भारतीय होने का अहसास कराते हैं। उन्होंने 1947 के देश विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि हमें विभाजन से हुई पीड़ा और उस समय हुए भयानक हिंसक घटनाक्रम को कभी नहीं भूलना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर विभाजन के शिकार हुए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि विभाजन के समय भयंकर हिंसा हुई और करोड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। अगस्त 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के साथ ही भारत का विभाजन हुआ और भारत तथा पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बने। इस विभाजन ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में लाखों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी। दंगे, अशांति, हिंसा, वैमनस्य, नरसंहार, लूटपाट, भुखमरी और दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े जबरन पलायन में से एक इस समय हुआ। पंजाब और बंगाल जैसे प्रांतों ने इस त्रासदी का सबसे भयावह असर देखा, जिसकी चोट आज भी महसूस की जाती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के साथ लोकतंत्र को अपनाया, जिसमें लिंग, धर्म और अन्य किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं था। कई चुनौतियों के बावजूद, भारत ने सफलतापूर्वक लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाया, जो हमारे प्राचीन लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे पुराने गणराज्यों का घर है और इसे सही मायनों में ‘लोकतंत्र की जननी’ कहा जाता है। संविधान अपनाने के बाद हमने मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं बनाईं और संविधान व लोकतंत्र को सर्वोपरि माना।”
उन्होंने 15 अगस्त की ऐतिहासिक महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि औपनिवेशिक शासन के लंबे वर्षों में पीढ़ियों ने स्वतंत्रता का सपना देखा। देश के हर कोने से महिला-पुरुष, युवा-बुजुर्ग विदेशी शासन से मुक्ति चाहते थे। उनके संघर्ष का आशावाद आज भी हमारे प्रगति पथ का प्रेरणास्रोत है। राष्ट्रपति ने कहा, “कल जब हम तिरंगे को सलामी देंगे, तो हम उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि देंगे जिनके बलिदानों से हमें आजादी मिली।”
गौरतलब है कि देश 15 अगस्त 2025 को 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इस वर्ष का विषय ‘नया भारत’ है, जो सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को दर्शाता है। यह समारोह एक समृद्ध, सुरक्षित और साहसी नए भारत के निरंतर उदय को मनाने और देश को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाने की शक्ति प्रदान करने का अवसर होगा।-(ANI)


