राष्ट्रपति मुर्मु का जनजातीय युवाओं को संदेश- शिक्षा और तकनीक से बनाएं विकसित भारत

जनजातीय कार्य मंत्रालय की प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों के एक समूह ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने जनजातीय युवाओं को शिक्षा, प्रौद्योगिकी और अपनी सांस्कृतिक विरासत के बल पर आगे बढ़ने का संदेश दिया तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

प्रतिभा को अवसर और मार्गदर्शन की जरूरत

लाभार्थी युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन, सहयोग और उचित मंच उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर गांवों, दूरदराज के क्षेत्रों और जनजातीय अंचलों से भी ऐसे युवा सामने आते हैं, जो देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

छात्रवृत्ति योजनाएं सपनों को देती हैं उड़ान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय समुदायों से आने वाले युवाओं को सशक्त बनाने और उनका उत्थान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाएं केवल वित्तीय सहायता का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं के सपनों को पंख देने का कार्य करती हैं। ये योजनाएं उन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलती हैं, जिनकी प्रगति संसाधनों की कमी के कारण बाधित होती है।

शिक्षा आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का आधार

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी जीवन-यात्रा में भी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उनकी उपलब्धियां और अनुभव उन बच्चों के लिए प्रेरणा बनें, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

विरासत पर गर्व करते हुए करें राष्ट्र निर्माण में योगदान

द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि युवा देश की शक्ति, आशा और उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक हैं। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदायों से आने वाले युवाओं से अपनी जड़ों और संस्कृति को न भूलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी विरासत पर गर्व करते हुए शिक्षा और प्रौद्योगिकी की शक्ति के साथ आगे बढ़ेंगे, तब वे एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि युवा जिस भी क्षेत्र का चयन करें, वे समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देकर देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। (इनपुट: पीआईबी)