रोम में भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय वार्ता से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम ने एक साझा लेख लिखा है। दोनों नेताओं ने कई अहम बातें इस लेख के माध्यम से साझा की है, जो दोनों देशों के रिश्तों को और भी मजबूती दे रही है। 

इसमें लिखा गया है कि भारत और इटली के द्विपक्षीय संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गए हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। साधारण मित्रता से आगे बढ़कर यह संबंध अब स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुका है।

बदलते वैश्विक माहौल में दोनों देश उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर निरंतर संवाद के जरिए अपनी साझेदारी को नई गति दे रहे हैं। यह साझेदारी आर्थिक शक्ति, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों वर्ष पुरानी सभ्यतागत विरासत को एक सूत्र में पिरोती है।

दोनों देश इस मूल सच्चाई को समझते हैं कि 21वीं सदी में किसी राष्ट्र की समृद्धि और सुरक्षा उसकी नवाचार (इनोवेशन) करने की क्षमता, ऊर्जा परिवर्तन को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने और रणनीतिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने पर निर्भर करेगी। इसी सोच के साथ दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा व्यापक बनाने का संकल्प लिया है।

आर्थिक और औद्योगिक तालमेल

इटली की डिजाइन उत्कृष्टता, विनिर्माण कौशल और विश्वस्तरीय सुपरकंप्यूटर क्षमता को भारत की तेज वृद्धि वाली अर्थव्यवस्था, विशाल इंजीनियरिंग प्रतिभा, स्केल और जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम (100 से अधिक यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्टअप) के साथ जोड़कर एक शक्तिशाली साझा मूल्य-निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। दोनों देश 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। इसमें रक्षा एवं एयरोस्पेस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, मशीनरी, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, कृषि-खाद्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा।

‘मेड इन इटली’ की गुणवत्ता ‘मेक इन इंडिया’ की महत्वाकांक्षाओं के साथ पूरी तरह सामंजस्य बिठाती है। दोनों देशों में एक-दूसरे की कंपनियों की संख्या अब 1,000 से अधिक हो चुकी है, जो सप्लाई चेन के एकीकरण की दिशा में सकारात्मक विकास है।

प्रौद्योगिकी, AI और अंतरिक्ष सहयोग

तकनीकी नवाचार इस साझेदारी का मुख्य आधार है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार दिया जाएगा। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल साउथ के लिए एक मिसाल बन चुका है। दोनों देश AI के विकास को जिम्मेदार और मानव-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत का MANAV विजन और इटली की एल्गोर-एथिक्स अवधारणा इस दिशा में मार्गदर्शक हैं। 

दोनों देश AI को समावेशी विकास का शक्तिशाली माध्यम बनाना चाहते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ में। साइबर सुरक्षा, क्षमता निर्माण और खुला, विश्वसनीय डिजिटल वातावरण बनाने पर भी जोर दिया गया है। यह दृष्टिकोण इटली की G7 अध्यक्षता और 2026 के नई दिल्ली AI इम्पैक्ट समिट के निष्कर्षों से जुड़ा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति और इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता नई संभावनाएं खोल रही हैं।

सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी

रक्षा, सुरक्षा और सामरिक प्रौद्योगिकी में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास बढ़ाए जाएंगे।

ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय स्रोतों, ग्रीन हाइड्रोजन, स्मार्ट ग्रिड और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस है। भारत की ग्रीन हाइड्रोजन निर्यात क्षमता और इटली की उन्नत रिन्यूएबल टेक्नोलॉजी एक-दूसरे को पूरक बनाती है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में इटली का सहयोग अहम होगा।

इंडो-मेडिटेरेनियन का उदय

भारत इंडो-पैसिफिक और भूमध्यसागर के केंद्र में स्थित हैं। दोनों देश अब इंडो-मेडिटेरेनियन नामक एक नए जुड़े हुए क्षेत्र की संकल्पना कर रहे हैं, जो व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, डेटा और विचारों का महत्वपूर्ण गलियारा बनेगा और हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ेगा। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) इसी दूरदर्शी सोच का हिस्सा है।

सांस्कृतिक नींव

यह साझेदारी सांस्कृतिक गहराई पर टिकी है। भारतीय संस्कृति के ‘धर्म’ (कर्तव्यभाव) और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत तथा इटली की पुनर्जागरण कालीन मानवतावादी परंपरा दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सामंजस्य पैदा करते हैं।

भारत और इटली की यह साझेदारी लोगों को केंद्र में रखते हुए मजबूत, आधुनिक और भविष्योन्मुखी बनाने का प्रयास है, जो न केवल दोनों देशों को लाभ पहुंचाएगी बल्कि दो महाद्वीपों के बीच पुल का काम भी करेगी।

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