पीएम मोदी ने कालचक्र अभिषेक समारोह का किया उद्घाटन, खुद को बताया सौभाग्यशाली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय भूटान दौरे के दूसरे दिन, बुधवार को कालचक्र अभिषेक का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने खुद को सौभाग्यशाली बताया।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उद्घाटन कार्यक्रम की तस्वीर पोस्ट की

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उद्घाटन कार्यक्रम की तस्वीर पोस्ट की। तस्वीर में पीएम मोदी भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, चतुर्थ नरेश के साथ नजर आए। उन्होंने लिखा, “भूटान के राजा महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और महामहिम चतुर्थ नरेश के साथ कालचक्र ‘समय का चक्र’ अभिषेक का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसकी अध्यक्षता परम पावन जे खेंपो ने की, जिसने इसे और भी विशेष बना दिया।”

यह दुनिया भर के बौद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान 

उन्होंने लिखा, “यह दुनिया भर के बौद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जिसका सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। कालचक्र अभिषेक चल रहे वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव का एक हिस्सा है, जिसने बौद्ध धर्म के भक्तों और विद्वानों को भूटान में एक साथ लाया है।”

भूटान के प्रधानमंत्री छेरिंग तोबगे ने ‘एक्स’ पर लिखा यह संदेश

भूटान के प्रधानमंत्री छेरिंग तोबगे ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवित्र कालचक्र अभिषेक का उद्घाटन और आशीर्वाद दिया, जो आज चल रहे वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के एक भाग के रूप में शुरू हुआ।”

इससे पहले पीएम मोदी ने थिम्पू में भूटान के चौथे नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक से की थी मुलाकात 

इससे पहले पीएम मोदी ने थिम्पू में भूटान के चौथे नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने मुलाकात की तस्वीर ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बताया, “महामहिम चतुर्थ नरेश के साथ एक अच्छी बैठक हुई। 

पीएम मोदी ने भारत-भूटान संबंधों को और मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयासों की सराहना की

भारत-भूटान संबंधों को और मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में उनके व्यापक प्रयासों की सराहना की। ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी में सहयोग पर चर्चा हुई। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना की प्रगति की सराहना की, जो हमारी एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप है।”

11 नवंबर, 1955 को जन्मे जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने भूटान के चौथे नरेश के रूप में कार्य किया। उनका शासनकाल 1972 से 2006 तक चला और उन्हें भूटान के सबसे दूरदर्शी और प्रिय राजाओं में से एक माना जाता है। उनके नेतृत्व में, भूटान का आधुनिकीकरण हुआ, राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई और एक अद्वितीय सुख-आधारित दर्शन अपनाया गया जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। (इनपुट-एजेंसी) 

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