इनकम टैक्स (इंटरनेशनल टैक्सेशन) की प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर मोनिका भाटिया ने बुधवार को कहा कि तेजी से बदलते ग्लोबल बिजनेस माहौल और टेक्नोलॉजी के बीच भारत को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए नीतिगत स्थिरता व स्पष्टता सुनिश्चित करते हुए अपने सही टैक्स बेस की रक्षा करनी होगी।
मुख्य चुनौती: स्थिरता और राजस्व सुरक्षा का संतुलन
ASSOCHAM द्वारा आयोजित 23वें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मोनिका भाटिया ने कहा, “भारत के इंटरनेशनल टैक्स फ्रेमवर्क के लिए मुख्य चुनौती ग्लोबल निवेशकों को जरूरी पॉलिसी स्थिरता और स्पष्टता देते हुए अपने सही टैक्स बेस की रक्षा करना है।”
उन्होंने बताया कि टैक्स प्रोफेशनल्स, बिजनेस, टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन और नीति निर्माता वैश्विक अर्थव्यवस्था व तकनीक में हो रहे तेज बदलावों से जूझ रहे हैं। सरकार ने हाल के महीनों में बड़े भू-राजनीतिक बदलावों और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद टैक्स निश्चितता को मजबूत करने तथा स्थिर राजकोषीय व्यवस्था बनाने के कई कदम उठाए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी जरूरी
भाटिया ने जोर दिया कि भारत को ओईसीडी, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए, ताकि वैश्विक टैक्स नियम विकासशील व बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं के हितों को ध्यान में रखें। जैसे-जैसे व्यवसाय कई देशों में फैल रहे हैं और टैक्स प्रशासन जटिल क्रॉस-बॉर्डर लेन-देन से निपट रहा है, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
टैक्स प्रशासन में एआई और टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका
उन्होंने टैक्स प्रशासन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। टैक्स अधिकारी जटिल ओनरशिप स्ट्रक्चर और नियमों के उल्लंघन के संभावित मामलों की पहचान के लिए तेजी से एआई का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन नियमों का पालन करने वाले टैक्सपेयर्स पर अनावश्यक बोझ नहीं डाला जाएगा। टैक्स प्रावधानों की एक समान व्याख्या और क्षमता निर्माण भी जरूरी है।
विवाद कम करने के ठोस कदम
भाटिया ने विवादों को कम करने और टैक्सपेयर्स को ज्यादा निश्चितता देने के लिए उठाए गए अहम कदमों का जिक्र किया। इनमें नया इनकम टैक्स एक्ट, सेफ हार्बर नियमों में बदलाव और एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (एपीए) सिस्टम शामिल हैं। सेफ हार्बर प्रावधानों का विस्तार—जिसमें थ्रेशोल्ड बढ़ाना और ऑटोमेटेड व ग्रुप-बेस्ड सिस्टम लागू करना शामिल है—विवादों को रोकने के सरकार के इरादे का मजबूत संकेत है।
एपीए के तहत भारत ने फ्रांस, इंडोनेशिया, आयरलैंड और स्वीडन समेत कई देशों के साथ 20 से अधिक नए द्विपक्षीय समझौते किए हैं। कुल समझौतों की संख्या 1,035 तक पहुंच गई है, जिनसे हजारों असेसमेंट वर्षों के लिए निश्चितता मिली है।
साझा प्रयास से आगे बढ़ना होगा
नई टैक्स व्यवस्था को लागू करना एक सतत प्रक्रिया है और कुछ क्षेत्रों में और स्पष्टीकरण की जरूरत हो सकती है। भाटिया ने कहा, “यह एक ऐसा सफर है जिसे हम साथ मिलकर तय करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने टैक्स प्रशासन, प्रोफेशनल्स और बिजनेस के बीच निरंतर संवाद व सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया। सरकार और टैक्स प्रोफेशनल समुदाय को साझेदार के रूप में काम करना चाहिए, ताकि टैक्सपेयर्स सही दर पर, सही समय पर और सही मात्रा में टैक्स का भुगतान करें। (इनपुट-एजेंसी)


