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AI एजेंट्स की प्रगति उम्मीद से धीमी, अगले 3-6 महीनों में बड़े नतीजों की उम्मीद: मार्क जुकरबर्ग

मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने स्वीकार किया है कि कंपनी के AI एजेंट्स (Artificial Intelligence Agents) का विकास उनकी अपेक्षा के अनुरूप गति नहीं पकड़ पाया है। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि कंपनी को अपने AI निवेशों का बड़ा लाभ अगले तीन से छह महीनों में मिलना शुरू हो जाएगा।

कर्मचारियों के साथ आयोजित एक आंतरिक टाउनहॉल बैठक में जुकरबर्ग ने कहा कि पिछले चार महीनों में एजेंटिक AI का विकास उस रफ्तार से आगे नहीं बढ़ा, जिसकी कंपनी को उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, “हमारी नई संगठनात्मक संरचना पर लगाए गए दांव अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हुए हैं।”

पुनर्गठन में भी रही कमियां

जुकरबर्ग ने माना कि इस वर्ष किया गया कंपनी का पुनर्गठन पूरी तरह व्यवस्थित नहीं था और इसके समय का आकलन भी सही नहीं रहा।

मई में मेटा ने अपनी वैश्विक कार्यबल का लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की थी और करीब 7,000 कर्मचारियों को AI-केंद्रित टीमों में स्थानांतरित किया था। इस फैसले के बाद कर्मचारियों की ओर से असंतोष भी सामने आया था।

AI एजेंट्स पर था बड़ा दांव

उन्होंने बताया कि वर्ष की शुरुआत में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को चिंता थी कि मेटा AI तकनीक अपनाने में पीछे न रह जाए। उस समय Anthropic के Claude Code जैसे AI टूल्स को लेकर काफी आशावाद था, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।

AI एजेंट्स ऐसे स्वचालित सिस्टम होते हैं जो उपयोगकर्ता की ओर से विभिन्न कार्य स्वयं कर सकते हैं।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश

मेटा इस वर्ष AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की तैयारी में है। यह वैश्विक स्तर पर बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा AI पर किए जा रहे 700 अरब डॉलर से अधिक के कुल निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जुकरबर्ग ने कहा कि अगले 3 से 6 महीनों में कंपनी को इन निवेशों का अधिक स्पष्ट लाभ दिखाई देने लगेगा।

माउस-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर पर भी दिया अपडेट

टाउनहॉल के दौरान मेटा के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) एंड्रयू बोसवर्थ ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी के विवादित माउस-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर की समीक्षा में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि कर्मचारियों के निजी डेटा का उपयोग AI मॉडल के प्रशिक्षण में किया गया हो।

उन्होंने कहा कि यदि जांच पूरी होने के बाद यह सॉफ्टवेयर दोबारा शुरू किया जाता है, तो इसे “ऑप्ट-इन” आधार पर लागू किया जाएगा। यानी केवल वही कर्मचारी इसमें शामिल होंगे जो अपनी सहमति देंगे।

-(इनपुटःरॉयटर्स)

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