सीएम योगी के नेतृत्व में ग्रामोद्योग को बढ़ावा, 16,000 युवाओं को रोजगार का लक्ष्य

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन योजनाओं के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है।

800 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य

खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 800 नई इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा है। इसके माध्यम से राज्य में लगभग 16,000 लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग ने 40 करोड़ रुपए के बैंक ऋण के जरिए इन इकाइयों की स्थापना की योजना बनाई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

बैंक ऋण और सब्सिडी का लाभ

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को बैंक ऋण के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत सब्सिडी आधारित ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे युवा अपने लघु उद्यम स्थापित कर सकें। इसके अलावा, विभाग की ओर से प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जाता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों और पलायन पर रोक लग सके।

पंडित दीनदयाल योजना के तहत 10 करोड़ रुपए का प्रावधान

पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से स्थापित इकाइयों को सशक्त बनाने के लिए बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान उपलब्ध कराती है। इससे उद्यमियों को वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी और इकाइयों के संचालन व विस्तार को मजबूती मिलेगी।

‘एक जिला एक उत्पाद’ को मिलेगा बढ़ावा

योजना का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम स्वरोजगार योजना और ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसी पहलों से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। योगी सरकार के ये कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। (इनपुट: आईएएनएस)