भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने 13 अगस्त, 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) क्लस्टर वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 लॉन्च की। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पीएसए कार्यालय के अधिकारियों के साथ देशभर में स्थापित आठ एसएंडटी क्लस्टरों के सीईओ, सीओओ और प्रधान अन्वेषक शामिल हुए। रिपोर्ट में क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने और अनुसंधान को वास्तविक उपयोग, फील्ड डिप्लॉयमेंट और व्यावसायीकरण तक पहुंचाने में एसएंडटी क्लस्टरों की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
आठ एसएंडटी क्लस्टर हुए शामिल
रिपोर्ट लॉन्च कार्यक्रम में पीएसए कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी, वैज्ञानिक-एफ डॉ. विशाल चौधरी, वैज्ञानिक-डी डॉ. संतोष नायर और तकनीकी स्टाफ डॉ. शेफाली उत्तम भी मौजूद रहीं। देश के आठ प्रमुख एसएंडटी क्लस्टरों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इनमें आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन (AMTZ Vizag), बेंगलुरु साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर (BeST), भुवनेश्वर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (BCKIC), दिल्ली रिसर्च इम्प्लीमेंटेशन एंड इनोवेशन क्लस्टर (DRIIV), जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (JCKIC), पंजाब यूनिवर्सिटी-आईआईटी रोपड़ रीजनल एक्सीलेरेटर फॉर हॉलिस्टिक इनोवेशंस (PI-RAHI), पुणे नॉलेज क्लस्टर (PKC) और रिसर्च एंड इनोवेशन सर्कल ऑफ हैदराबाद (RICH) शामिल हैं।
सहयोग और उद्योग सहभागिता पर जोर
रिपोर्ट लॉन्च करते हुए प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने विभिन्न क्लस्टरों के बीच सहयोग बढ़ाने, उद्योग के साथ मजबूत जुड़ाव और तकनीक को वास्तविक उपयोग में लाने पर जोर दिया। उन्होंने सफल क्षेत्रीय समाधानों को दूसरे क्षेत्रों में अपनाने और बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत बताई। उन्होंने टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL), वास्तविक दुनिया में परीक्षण, व्यावसायीकरण और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के आधार पर परिणामों को मापने पर भी जोर दिया।
कंसोर्टियम मॉडल से बढ़ रही परिपक्वता
पीएसए कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने कंसोर्टियम आधारित मॉडल के जरिए एसएंडटी क्लस्टरों की बढ़ती परिपक्वता को रेखांकित किया। उन्होंने तकनीक के वैलिडेशन और ट्रांसलेशन में उद्योग की भागीदारी मजबूत करने के साथ राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
‘नेशनल टेक्नोलॉजी एक्सेलेरेटर’ की भूमिका
रिपोर्ट में एसएंडटी क्लस्टरों को क्षेत्रीय इनोवेशन इकोसिस्टम और ‘नेशनल टेक्नोलॉजी एक्सेलेरेटर’ के रूप में विकसित होते संस्थानों के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), स्टार्टअप सहायता और उद्योग सहभागिता के जरिए ये क्लस्टर अनुसंधान और तकनीक को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने में भूमिका निभा रहे हैं।
रिसर्च से फील्ड डिप्लॉयमेंट तक पहुंचे समाधान
रिपोर्ट के अनुसार, कई पहलें अनुसंधान और पायलट परीक्षण के चरण से आगे बढ़कर फील्ड डिप्लॉयमेंट और व्यावसायीकरण तक पहुंच चुकी हैं। इनमें ई-यंत्रम, एआई-सक्षम डिजिटल पोडियाट्री क्लिनिक, एआई-सक्षम कृषि और मौसम इंटेलिजेंस, देश में बने पेसमेकर के पार्ट्स, रोगी-विशिष्ट 3डी प्रिंटेड इम्प्लांट्स, केमअमेज और वन हेल्थ पहल शामिल हैं। Kalaanubhav.in और i-Passport जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म भी क्लस्टर आधारित नवाचारों का हिस्सा हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हुआ विस्तार
रिपोर्ट में एसएंडटी क्लस्टरों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है। दिसंबर 2025 में एसएंडटी क्लस्टरों का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें 35 से अधिक देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 12 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद स्वास्थ्य, उभरती प्रौद्योगिकियों और नेट-जीरो तकनीकों के क्षेत्र में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी, इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्मार्ट फार्म नेटवर्क और यूके कैटापुल्ट नेटवर्क के साथ सहयोग आगे बढ़ा है।
स्वास्थ्य से स्मार्ट कृषि तक सहयोग
एसएंडटी क्लस्टरों ने स्वास्थ्य सेवा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट कृषि, सस्टेनेबल मोबिलिटी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, उभरती प्रौद्योगिकियों और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्रस्तुत किए। अंतर-क्लस्टर सहयोग के जरिए सफल समाधानों को दोहराने और उनका विस्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सफल समाधानों को दूसरे क्लस्टरों तक पहुंचाया
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल पोडियाट्री क्लिनिक का विस्तार BeST से PI-RAHI तक हुआ है। JCKIC की पहल Kalaanubhav.in को विभिन्न क्लस्टरों में विस्तारित किया जा रहा है। वहीं I-STEM का एक कार्यक्रम I-RISE एसएंडटी क्लस्टरों के जरिए एडवांस्ड साइंटिफिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मजबूत कर रहा है।
i-Passport के राष्ट्रीय विस्तार पर विचार
AMTZ की i-Passport पहल को भी राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। यह पहल नवप्रवर्तकों को साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग, मेंटरशिप, रेगुलेटरी सपोर्ट और उद्योग नेटवर्क तक पहुंच उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इससे तकनीक आधारित नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार और वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में तकनीकी बदलावों का दस्तावेज
एसएंडटी क्लस्टर वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में क्षेत्रीय नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ तकनीकों के विकास, परीक्षण, तैनाती और व्यावसायीकरण की प्रगति को दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में क्लस्टरों के बीच सहयोग और उद्योग से जुड़ाव को बढ़ाकर अनुसंधान के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव को व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। (इनपुट: पीआईबी)


