पर्यावरण बचाने के लिए जनभागीदारी जरूरी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से प्रकृति और जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया तथा तस्करों के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह मातृभूमि और पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने लोगों से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि कोई टोंटी चोरी कर रहा है या पानी बर्बाद कर रहा है तो ऐसे लोगों को टोकना चाहिए।

प्रदेशवासियों को दिलाए पांच पर्यावरणीय संकल्प

मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प दिलाए। इनमें ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण, लगाए गए पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि पानी व्यर्थ न जाए।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर जताई चिंता

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल, वन और जीवन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन मानव समाज ने लंबे समय तक इनकी उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों की तुलना में मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का अंतर आ चुका है, जिसका सबसे अधिक असर कृषि और किसानों पर पड़ेगा। अतिवृष्टि, अनावृष्टि और खाद्यान्न संकट जैसी चुनौतियां भविष्य के लिए चेतावनी हैं।

भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण का महत्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा ने हमेशा प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया है। उन्होंने भगवान राम के कथन “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का उल्लेख करते हुए कहा कि मां और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता और कर्तव्यबोध हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रत्येक तत्व के साथ मानव का संबंध जोड़ा गया है, जो पर्यावरण संरक्षण की गहरी सोच को दर्शाता है।

पौधरोपण और वन क्षेत्र विस्तार पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रदेश में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में वन विभाग की नर्सरियों में जहां केवल पांच लाख पौधे उपलब्ध थे, वहीं आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अभियान के तहत पांच करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं और जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

जलस्रोतों और रामसर स्थलों के संरक्षण की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है और तालाबों, पोखरों, बावड़ियों तथा आर्द्रभूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कर संरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नौ वर्ष पहले प्रदेश में केवल एक रामसर स्थल था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। बलिया स्थित सुरहा ताल को हाल ही में प्रदेश के 13वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली है।

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका

योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों, नगर निकायों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से तालाबों, कुओं, पोखरों और अमृत सरोवरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने व्यापक आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ वन क्षेत्र बढ़ाने में भी सफलता हासिल की है और पिछले नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। (इनपुट: आईएएनएस)