RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा- ‘मध्य पूर्व में तनाव के बीच ‘वेट एंड वॉच’ मोड में आरबीआई’

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक मिडिल ईस्ट में तनाव पर क़रीब से नज़र रख रहा है और भविष्य की ब्याज दरों को लेकर फ़िलहाल वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट रहने से भारत में व्यापक स्तर पर मुद्रास्फीति का ख़तरा है।

अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय में अपने भाषण में मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सीधा ख़तरा है, क्योंकि इस क्षेत्र की देश के व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के निर्यात का लगभग छठा हिस्सा, आयात का पांचवा हिस्सा, कच्चे तेल के आयात का आधा हिस्सा, उर्वरक आयात का दो-पांचवां हिस्सा और भारत को आने वाली रेमिटेंस में लगभग दो-तिहाई का योगदान देता है।

उन्होंने कहा, वास्तविक चिंता दूसरे दौर के प्रभावों को लेकर है। आर.बी.आई गवर्नर ने चेतावनी दी कि आपूर्ति में अचानक आई कमी, अगर जारी रही तो सामान्य मूल्यों में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

हालाँकि उन्होंने कहा कि आर.बी.आई ब्याज दरों को लेकर जल्दबाज़ी में नहीं है और वेट एंड वॉच मोड में है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति आंकड़ों पर भी निर्भर रहेगी और जोखिमों के संतुलन का लगातार पुनर्मुल्यांकन करती रहेगी।

एमपीसी ने जून 2025 से तटस्थ रुख बनाए रखा है, जबकि उसी वर्ष फरवरी से ब्याज दरों में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की गई है।

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट पर बोलते हुए, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने अकेले मार्च में 22 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय बैंक अब छोटे किसानों और व्यवसाय मालिकों को तत्काल ऋण उपलब्ध कराने के लिए यूनिफाइड लोन इंटरफेस (यूएलआई) विकसित कर रहा है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकार का राजकोषीय घाटा-से-जीडीपी अनुपात 2020-21 में 9.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 4.4 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने कहा कि 2024-25 में भारत का सामान्य सरकारी ऋण-से-जीडीपी अनुपात 81.1 प्रतिशत है, और यह भी बताया कि जर्मनी और रूस को छोड़कर, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में नॉमिनल जीडीपी के आधार पर दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में से अधिकांश का ऋण अनुपात भारत से अधिक है। (इनपुट-एजेंसी)

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