भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों का ऐलान करते हुए कहा कि वैश्विक अस्थिरता के कारण छोटी अवधि में महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है।
16 महीनों बाद महंगाई लक्ष्य से ऊपर
लगातार 16 महीनों तक आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने के बाद जून में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। पहली तिमाही में महंगाई आरबीआई के पहले के अनुमान से 30 आधार अंक कम रही, जिससे इनपुट लागत दबाव का असर सीमित रहा। खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) मई और जून में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई और भी कम 2.3-2.5 प्रतिशत रही, जो मांग-पक्ष से महंगाई दबाव कम होने का संकेत देता है।
तिमाही-वार अनुमान
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है:
– दूसरी तिमाही: 4.7 प्रतिशत
– तीसरी तिमाही: 5.9 प्रतिशत
– चौथी तिमाही: 5.5 प्रतिशत
वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए अनुमान 5.3 प्रतिशत है।
अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन जोखिम बने हुए
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इसे घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की अच्छी गतिविधि, मजबूत निवेश रुझान और निर्यात का सहारा मिल रहा है। हालांकि महंगाई अनुमान पर जोखिम बने हुए हैं। इनमें अल-नीनो का बारिश पर असर, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। (इनपुट-एजेंसी)


