UPI पर MDR का प्रस्ताव अभी जल्दबाजी: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि UPI सिस्टम को चलाने के लिए डिजिटल पेमेंट के पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत किसी न किसी को तो उठानी ही होगी, लेकिन इसका बोझ आम ग्राहकों पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या कमीशन लगाने की योजना को लेकर  उन्होंने कहा, “इस पर कुछ भी कहना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। आइए घटनाक्रम का इंतजार करें और देखें। आखिरकार लागत तो ग्राहक ही उठाते हैं, लेकिन हो सकता है कि यह आम ग्राहक न हों।”

आम यूजर्स से शुल्क का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं

RBI गवर्नर ने पिछले महीने भी स्पष्ट किया था कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत तो उठानी ही होगी, लेकिन आम यूजर्स से शुल्क लेने का कोई औपचारिक ढांचा या प्रस्ताव नहीं है। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में कानूनी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद ₹2,000 से ज्यादा के हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन पर भविष्य में मर्चेंट शुल्क के लिए फ्लेक्सिबिलिटी लाना है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आम ग्राहकों के UPI पेमेंट मुफ्त ही रहेंगे।

90 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजैक्शन—जिनमें दूध, सब्जी और किराने का रोजाना का सामान खरीदना शामिल है—पर MDR शुल्क नहीं लगेगा। फिलहाल क्रेडिट और डेबिट कार्ड से खरीदारी MDR के दायरे में आती है, लेकिन ज्यादातर मर्चेंट यह लागत ग्राहकों पर नहीं डालते।

कानून में प्रस्तावित बदलाव क्या है?

वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इससे जीरो-चार्ज के कड़े नियमों को हटाकर भविष्य में ट्रांजैक्शन शुल्क पर सरकारी नोटिफिकेशन जारी किया जा सकेगा। लोकसभा में पेश किया गया बिल कानूनी ढांचे में बदलाव करता है, जिससे सरकार को भविष्य में यह तय करने की छूट मिलेगी कि किन डिजिटल पेमेंट मोड को शुल्क से छूट दी जाए और किन पर MDR लगाया जा सकता है। अभी कानून बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे नोटिफाइड पेमेंट मोड पर शुल्क लगाने से रोकता है। यह संशोधन इस व्यापक कानूनी सुरक्षा को हटा देगा और सरकार के लिए रास्ता साफ करेगा। (इनपुट-एजेंसी)