जेफरीज के अनुसार, भारत चालू वित्त वर्ष में 6.5-7 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज करने की राह पर है, जबकि नाममात्र जीडीपी वृद्धि 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। इसे मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार से समर्थन मिल रहा है।
अपनी ताजा ‘GREED & fear’ रिपोर्ट में जेफरीज ने कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। बैंक ऋण वृद्धि में तेजी आई है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को दिए जाने वाले कर्ज में विशेष रूप से मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया, “नतीजा यह है कि भारत इस वित्त वर्ष में 6.5-7 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि और लगभग 11-12 प्रतिशत की नाममात्र जीडीपी वृद्धि हासिल करने की राह पर है।”
जेफरीज ने कहा कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई, जबकि MSME को दिए गए कर्ज में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, उद्योग क्षेत्र को ऋण में 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र के ऋण में 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
ब्रोकरेज ने कहा कि कॉरपोरेट ऋण में आई तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (Capex) में अब आखिरकार तेजी आ सकती है।
जेफरीज ने कहा, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से अपेक्षित निजी क्षेत्र का कैपेक्स चक्र आखिरकार शुरू हो सकता है।”
रिपोर्ट में कहा गया कि नाममात्र जीडीपी वृद्धि में सुधार से कॉरपोरेट आय में भी मजबूती आ सकती है। जेफरीज के इंडिया रिसर्च प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि नाममात्र जीडीपी में तेजी से चालू वित्त वर्ष में आय वृद्धि 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत हो सकती है।
जेफरीज ने कहा कि घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है। इसके लिए उसने वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में मजबूती, बिजली खपत में सुधार और आवासीय रियल एस्टेट बिक्री में बढ़ोतरी का उल्लेख किया।
अगस्त में GST संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी-मार्च में 1.8 प्रतिशत थी। चालू कैलेंडर वर्ष के पहले सात महीनों में भारत के सात प्रमुख शहरों में आवासीय रियल एस्टेट के बिके क्षेत्रफल में सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 2025 में इसमें 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
जेफरीज ने भारतीय रिजर्व बैंक की योजना के तहत विदेशी मुद्रा प्रवाह का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।
इसी समय, जेफरीज ने सरकार के राजकोषीय समेकन के रास्ते को भी रेखांकित किया। ब्रोकरेज के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और घटने की उम्मीद है।
(इनपुट-एएनआई)


