भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर इस साल मई में घटकर 2.82 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी बयान के अनुसार, यह खुदरा महंगाई फरवरी 2019 के बाद सबसे निचले स्तर पर है।
मई में खाद्य महंगाई दर घटकर 0.99 प्रतिशत हो गई, जो अक्टूबर 2021 के बाद सबसे कम है
मई में खाद्य महंगाई दर घटकर 0.99 प्रतिशत हो गई, जो अक्टूबर 2021 के बाद सबसे कम है। यह लगातार सातवां महीना है जब खाद्य महंगाई में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि रहा।आधिकारिक बयान के अनुसार, इस महीने महंगाई में आई महत्वपूर्ण गिरावट का कारण दालें, सब्जियां, फल, अनाज, घरेलू सामान एवं सेवाएं, चीनी और अंडों की कीमतों में कमी है।
ईंधन की कीमतों में नरमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट के चलते भी महंगाई दर में कमी आई है
इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में नरमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट के चलते भी महंगाई दर में कमी आई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई अनुमान को घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4 प्रतिशत था। यह जानकारी रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को दी।अब CPI आधारित महंगाई दर का अनुमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 3.7 प्रतिशत है, जिसमें पहली तिमाही में 2.9%, दूसरी में 3.4%, तीसरी में 3.9% और चौथी में 4.4% रहने का अनुमान है।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि बीते छह महीनों में महंगाई दर में उल्लेखनीय नरमी आई है
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि बीते छह महीनों में महंगाई दर में उल्लेखनीय नरमी आई है। अक्टूबर 2024 में महंगाई दर सहनशील दायरे से ऊपर थी, लेकिन अब यह 4 प्रतिशत के लक्ष्य से भी नीचे आ गई है, और इसमें व्यापक स्तर पर नरमी के संकेत मिल रहे हैं। निकट और मध्यम अवधि के दृष्टिकोण से अब यह विश्वास बढ़ा है कि महंगाई लक्ष्य के साथ न सिर्फ स्थायी रूप से संरेखित रहेगी, बल्कि यह संभावित रूप से लक्ष्य से थोड़ी कम भी रह सकती है।
खाद्य महंगाई में अंतरराष्ट्रीय जिंस कीमतों में नरमी और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण संयमित रहने की उम्मीद
मल्होत्रा ने कहा कि जहां खाद्य महंगाई का परिदृश्य नरम बना हुआ है, वहीं मुख्य महंगाई भी अंतरराष्ट्रीय जिंस कीमतों में नरमी और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण संयमित रहने की उम्मीद है। महंगाई में इस तीव्र गिरावट के चलते रिज़र्व बैंक ने पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 6 प्रतिशत से घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया यानी 50 आधार अंकों की कटौती की गई ताकि आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी 100 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की है
इसके साथ ही, आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी 100 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की है, जो 4 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा। यह कटौती चार चरणों में 25-25 आधार अंक की जाएगी। इस कदम से बैंकिंग प्रणाली में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी आएगी, जिससे तरलता और कर्ज वितरण को बढ़ावा मिलेगा।
फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की तेज कटौती की जा चुकी है
गवर्नर ने कहा कि फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की तेज कटौती की जा चुकी है, जिससे अब आरबीआई के पास बहुत सीमित गुंजाइश बची है। इसी कारण मौद्रिक नीति रुख को ‘समायोजनात्मक’ से बदलकर ‘तटस्थ’ कर दिया गया है, ताकि विकास और महंगाई के समग्र संतुलन पर नजदीकी निगरानी रखी जा सके।(इनपुट- आईएएनएस)


