‘उन्नत कृषि महोत्सव’ से आगे बढ़ा रोडमैप, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार विशेष कृषि रोडमैप अब कृषि परिवर्तन के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। रायसेन में आयोजित ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ के दौरान की गई घोषणा को आगे बढ़ाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक कर रोडमैप के क्रियान्वयन की समीक्षा की। बैठक में मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

किसानों की आय बढ़ाना रोडमैप का मुख्य लक्ष्य

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह रोडमैप केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि किसान की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण पर आधारित एक जवाबदेह मिशन है। उन्होंने कहा कि इसकी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना किसानों की शुद्ध आय में होने वाली वृद्धि होगी।

चार जिलों को बनाया जाएगा कृषि विकास का मॉडल

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास को कृषि सुधार के ऐसे सफल मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिन्हें भविष्य में देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट, मिट्टी की गुणवत्ता में कमी और किसानों की आय से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह रोडमैप तैयार किया गया है।

अल नीनो और जल संकट से निपटने की रणनीति

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो और संभावित जल संकट को देखते हुए अभी से ऐसी रणनीति तैयार की जा रही है जिससे रबी फसल सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि किसान की फसल और आय सुरक्षित रहती है तो वैज्ञानिक खेती और एकीकृत कृषि मॉडल के प्रति किसानों का विश्वास और मजबूत होगा।

‘वन टीम, वन टॉस्क’ के सिद्धांत पर होगा काम

केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल समितियों का गठन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने “वन टीम, वन टॉस्क” के मंत्र के साथ प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय समिति की तीन प्रमुख जिम्मेदारियां भी निर्धारित कीं—नीतिगत बाधाओं की पहचान और समाधान, केंद्र एवं राज्य योजनाओं का प्रभावी अभिसरण तथा जिला स्तर तक जवाबदेही सुनिश्चित करना।

किसान के खेत पर दिखेगा योजनाओं का संयुक्त असर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO), मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) और कृषि यंत्रीकरण योजनाओं को अलग-अलग नहीं चलाया जाएगा। इन सभी योजनाओं का संयुक्त प्रभाव सीधे किसान के खेत पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से उन्नत बीजों की आपूर्ति, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के जरिए प्रदर्शन खेतों का विकास और विस्तार गतिविधियों को समयबद्ध तरीके से जोड़ने की जिम्मेदारी राज्य स्तरीय समिति की होगी।

फसल विविधीकरण और समेकित कृषि प्रणाली पर जोर

बैठक में जिलेवार कृषि मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। विदिशा में सोयाबीन-मक्का अंतरफसल प्रणाली, सीहोर में उच्च मूल्य वाली फसलें, रायसेन में धान-लहसुन प्रणाली तथा देवास में मक्का-लहसुन-प्याज आधारित कृषि प्रणाली को किसानों तक पहुंचाने की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अलावा खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले में कम से कम एक ब्लॉक में समेकित कृषि प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके तहत डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी को खेती के साथ जोड़कर किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जाएंगे।

एफपीओ और बागवानी क्षेत्र को मिलेगा प्रोत्साहन

केंद्रीय मंत्री ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बाजार से जोड़ने, बागवानी क्षेत्र के लिए नर्सरी और कोल्ड चेन परियोजनाओं को बढ़ावा देने तथा जल संकट और भंडारण संबंधी चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि इससे उत्पादन से लेकर विपणन तक किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

प्रशिक्षण और तकनीकी संस्थानों की भूमिका बढ़ेगी

शिवराज सिंह चौहान ने किसान प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को रोडमैप की सफलता का आधार बताया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क को और सक्रिय बनाने तथा भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान जैसे संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान तैयार करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया, जो स्थानीय स्तर पर अन्य किसानों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा सके।

देशव्यापी कृषि परिवर्तन का मॉडल बन सकता है रोडमैप

रायसेन के ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ में की गई घोषणा अब एक ठोस क्रियान्वयन ढांचे का रूप लेती दिखाई दे रही है। शिवराज सिंह चौहान की पहल पर तैयार यह रोडमैप केवल चार जिलों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कृषि नवाचार, जल प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, फसल विविधीकरण और किसान आय वृद्धि के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)