रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद रविवार को स्वदेश रवाना हो गए। दो दिन तक चले शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को मंजूरी दी।
राष्ट्रपति पुतिन दो दिन के समिट से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। इस समिट को भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इस समिट में ब्रिक्स के सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेता भारत में इकट्ठा हुए।
अपनी यात्रा के दौरान, पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग मुख्य एजेंडा में शामिल थे। पुतिन ने पिछली बार दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था, लेकिन दोनों नेता इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में मिले थे।
राष्ट्रपति पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अन्य नेताओं के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। इस सम्मेलन के बाद एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया, जिसमें मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति और बातचीत पर जोर दिया गया।
उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल पश्चिमी ताकतों की तथाकथित “औपनिवेशिक मानसिकता” की आलोचना करने के लिए किया और उन पर एक अधिक बहुध्रुवीय दुनिया के उदय का विरोध करने का आरोप लगाया। (इनपुट-आईएएनएस)


