खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया कि खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।
12 वर्षों में रोजगार सृजन में 56% की वृद्धि
केवीआईसी के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में रोजगार सृजन में 56% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र के माध्यम से अब तक 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। आयोग ने कहा कि ग्रामीण भारत में उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में खादी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
पीएमईजीपी से लाखों लोगों को रोजगार
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। आयोग के मुताबिक यह योजना ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है।
ग्रामोद्योग विकास योजना से कारीगरों को मिला लाभ
ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत बड़ी संख्या में मशीनें और टूल-किट वितरित किए गए हैं। इनमें इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील, मधुमक्खी पालन बॉक्स, अगरबत्ती निर्माण मशीनें, जूता मरम्मत टूल-किट, पेपर प्लेट मशीनें, सिलाई और मोबाइल मरम्मत उपकरण सहित कई अन्य मशीनें शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 37,769 मशीनें और उपकरण वितरित किए गए। पिछले चार वर्षों में कुल 3,23,006 मशीनें और टूल-किट वितरित किए जा चुके हैं।
महिला सशक्तीकरण में भी अहम भूमिका
केवीआईसी ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2025-26 में आयोग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत 79,682 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल रहीं। यह कुल प्रशिक्षुओं का लगभग 59% है। इसके अलावा, पीएमईजीपी योजना के तहत 28,180 महिला उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए, जिससे 3,09,980 महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए।
खादी क्षेत्र में 80% से अधिक महिलाएं
आयोग के अनुसार, खादी क्षेत्र में लगभग पांच लाख कारीगर कार्यरत हैं, जिनमें 80% से अधिक महिलाएं हैं। इससे यह क्षेत्र महिला नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% तक वृद्धि
कारीगरों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में यह राशि 4 रुपए प्रति गट्ठर थी, जो अब बढ़कर 15 रुपए प्रति गट्ठर हो गई है। यह लगभग 275% की वृद्धि दर्शाती है।
सरकारी खरीद और राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में बढ़ोतरी
खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी खरीद बढ़कर 92.08 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। वहीं प्रदर्शनियों और विपणन पहलों के जरिए 30.83 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की गई। राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2013-14 में जहां इसकी बिक्री 0.87 करोड़ रुपए थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2.35 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। आयोग ने इसका श्रेय ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों और खादी के प्रति बढ़ती जागरूकता को दिया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा
केवीआईसी ने कहा कि खादी अब केवल पारंपरिक उत्पाद नहीं रह गई है, बल्कि यह नए भारत की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए मानदंड स्थापित कर इस क्षेत्र ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया है। (इनपुट: पीआईबी)


