एसबीआई रिसर्च की एक ताजा रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया है कि भारत के साथ वस्तु व्यापार पर अमेरिका द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाना एक गलत नीतिगत फैसला साबित हो सकता है। यह कदम अमेरिकी और उसके नागरिकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में भारत को अपनी संप्रभुता और किसानों की सुरक्षा के लिए रणनीतिक कदम उठाने चाहिए।
कृषि क्षेत्र में भारत की बढ़त
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2015 से 2024 के बीच दूध उत्पादन में वैश्विक दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। 2015 में भारत का दूध उत्पादन 155.5 मिलियन टन था, जो 2024 तक 36% बढ़कर 211.7 मिलियन टन हो गया। इस दौरान यूरोपीय संघ का उत्पादन 165.9 मिलियन टन और अमेरिका का 102.5 मिलियन टन रहा। भारत को अपने किसानों को वैश्विक समूहों की इसी तरह की प्रवृत्तियों से बचाने के लिए टिकाऊ बाजार और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
फार्मा क्षेत्र पर टैरिफ का असर
भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला का आधार है, जो अमेरिका की 35% जेनेरिक दवा जरूरतों को पूरा करता है। टैरिफ लगाने से दवा उत्पादन को अन्य देशों या अमेरिका में स्थानांतरित करने में 3-5 साल लग सकते हैं। इससे अमेरिका में स्वास्थ्य व्यय पर दबाव बढ़ेगा, जहां प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च $15,000 है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यय GDP का 17.6% है। मेडिकेयर और मेडिकेड, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का 36% हैं, पर भी असर पड़ेगा।
DOGE के उद्देश्यों पर खतरा
इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि टैरिफ से सस्ती दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे अमेरिकी नागरिकों और सरकार दोनों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। यह अमेरिका के DOGE उद्देश्यों और सरकारी खर्च कम करने की नीति के खिलाफ है। भारत को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत रखते हुए किसानों और फार्मा क्षेत्र की रक्षा करनी चाहिए। (इनपुट-एजेंसी)


