सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) तथा विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) के लिए शिक्षा तक समान पहुंच मजबूत करने के लिए छात्रवृत्ति, आवासीय अवसंरचना, विदेश में शिक्षा सहायता, फैलोशिप, कोचिंग और डिजिटल सुधारों के जरिए लक्षित पहल कर रहा है। मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित समुदायों के छात्रों को शिक्षा जारी रखने में सहायता देने के साथ उनकी वित्तीय बाधाओं को कम किया जा रहा है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से स्कूली शिक्षा को बढ़ावा
सुधांश पंत ने बताया कि अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य साक्षरता को बढ़ावा देना, स्कूल छोड़ने की दर कम करना और प्री-मैट्रिक स्तर पर शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करना है। यह योजना अनुसूचित जाति के बच्चों तथा उन बच्चों को सहायता प्रदान करती है जिनके माता-पिता या अभिभावक अस्वच्छ और जोखिम भरे व्यवसायों में लगे हुए हैं। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान योजना के तहत 4,893.03 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की गई और वार्षिक लाभार्थियों की कुल संख्या लगभग 299.66 लाख रही। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 562.36 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे 26.79 लाख छात्रों को लाभ मिला।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा को समर्थन
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एससी परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच बेहतर करना है। इसका लक्ष्य माध्यमिक शिक्षा के बाद की वित्तीय बाधाओं को कम करना, छात्रों की उपस्थिति मजबूत करना और उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी छात्रों के सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान योजना के तहत 46,581.54 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की गई, जबकि वार्षिक लाभार्थियों की कुल संख्या 612.98 लाख रही। वित्त वर्ष 2025-26 में 6,186.95 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे 47.53 लाख छात्र लाभान्वित हुए।
डीबीटी से छात्रवृत्ति वितरण में बढ़ी पारदर्शिता
विभाग ने वित्त वर्ष 2021-22 से पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को डीबीटी-सक्षम व्यवस्था में परिवर्तित किया है। इसके तहत छात्रवृत्ति की राशि लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जाती है। मंत्रालय के अनुसार, इस सुधार से जवाबदेही मजबूत हुई है, देरी और लीकेज में कमी आई है तथा अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर हुई है।
फर्जी और डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान
विभाग ने फर्जी और डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए डुप्लीकेशन निराकरण की व्यवस्था शुरू की है। इसके साथ लाभार्थियों और अधिकारियों के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा ई-केवाईसी आधारित सत्यापन की सुविधा भी दी गई है। डिजिलॉकर और एपीआई सेतु के साथ एकीकरण से प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन आसान हुआ है।
एक बार पंजीकरण से निगरानी व्यवस्था मजबूत
लाभार्थियों की विभिन्न योजनाओं और शैक्षणिक वर्षों में निगरानी के लिए एक बार पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की गई है। एआईएसएचई, यूडीआईएसई, एनसीवीटी और एससीवीटी के डेटाबेस के साथ एकीकरण से संस्थागत और छात्र अभिलेखों के सत्यापन में सहायता मिलती है। बहुस्तरीय जांच से विसंगतियों और दोहराव को कम करने में भी मदद मिलती है।
यूआईडीएआई, एनपीसीआई और पीएफएमएस से बेहतर हुआ वितरण
यूआईडीएआई, एनपीसीआई और पीएफएमएस के साथ एकीकरण से छात्रवृत्ति सहायता के सुचारू प्रसंस्करण और प्रत्यक्ष वितरण में मदद मिल रही है। इससे लाभार्थियों का प्रमाणीकरण मजबूत होने, धनराशि के प्रवाह के बेहतर प्रबंधन और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को बढ़ावा मिला है।
शिक्षा के अवसरों को लगातार मजबूत करने का लक्ष्य
सुधांश पंत ने आशा व्यक्त की कि निरंतर वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों के माध्यम से विभाग वंचित समुदायों के लिए शैक्षिक अवसरों को मजबूत करना जारी रखेगा। इन प्रयासों से छात्रों को अपनी शिक्षा जारी रखने और उच्च शिक्षा हासिल करने में सहायता मिलेगी। (इनपुट: पीआईबी)


