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राजेश एक्सपोर्ट्स मामले पर सेबी प्रमुख बोले- कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाया जाए मामला

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ नियामक कार्रवाई पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला अर्ध-न्यायिक (क्वासी-ज्यूडिशियल) प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका समाधान कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाना चाहिए।

भारत निवेशक सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत में तुहिन कांत पांडे ने कहा, “सिद्धांत के तौर पर हम मीडिया में किसी व्यक्तिगत मामले पर टिप्पणी नहीं करते। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसमें आदेश जारी किए जाते हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए या फिर कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं के माध्यम से उन्हें चुनौती दी जानी चाहिए। इसलिए मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि सेबी का टोकनाइजेशन पायलट कार्यक्रम पूरा होने में अभी छह से नौ महीने का समय लग सकता है। वह बॉन्ड ब्रोकरों और टोकनाइजेशन से संबंधित आगामी नियमों पर टिप्पणी कर रहे थे।

सेबी प्रमुख की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब हाल ही में नियामक ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रवर्तक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से रोक दिया है। सेबी ने उन पर वित्तीय अनियमितताओं, धन के कथित दुरुपयोग तथा फंड फ्लो और संबंधित पक्षों के लेनदेन से जुड़ी अपर्याप्त जानकारी देने का आरोप लगाया है।

इस कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 5 प्रतिशत के निचले सर्किट के साथ 94.50 रुपये के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था जब शेयर निचले सर्किट पर बंद हुआ।

पिछले सप्ताह भी सेबी के अंतरिम आदेश के बाद कंपनी के शेयर लगातार दो कारोबारी सत्रों में निचले सर्किट पर पहुंचे थे। नियामक ने अपने आदेश में वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर गलत प्रस्तुतीकरण का आरोप लगाया था।

सेबी की अंतरिम जांच में प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया कि व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से धन को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया गया, जबकि इसके संबंध में पर्याप्त खुलासा या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

नियामक के अनुसार, कंपनी को सही वित्तीय विवरण और धन के उपयोग तथा लाभार्थियों के बारे में जानकारी देने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन उसके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।

सेबी ने कंपनी के वैधानिक लेखा परीक्षकों पर भी सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। नियामक के मुताबिक, आश्वासन दिए जाने के बावजूद ऑडिट से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

सेबी का कहना है कि इस तरह का लगातार असहयोग महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने और जांच में बाधा डालने के प्रयासों की ओर संकेत करता है।

नियामक ने यह भी कहा कि कंपनी की लगभग 97 से 99 प्रतिशत आय को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया प्रतीत होता है और इन कथित अनियमितताओं को “गंभीर और अभूतपूर्व” बताया।

अंतरिम आदेश में कहा गया कि राजेश मेहता कंपनी के वित्तीय संचालन पर पर्याप्त नियंत्रण रखते थे। इसलिए उन्हें अगले आदेश तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी की प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री या अन्य किसी प्रकार का लेनदेन करने से रोक दिया गया है।

हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा कि उसकी आय सही तरीके से दर्ज की गई है और ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी तथा नियामक के बीच संवाद में कुछ कमी रही है। कंपनी ने भरोसा जताया कि प्रमाणित दस्तावेज उसके पक्ष का समर्थन करेंगे।

-इनपुटःआईएएनएस